रिपोर्ट – कबीर
मुजफ्फरनगर। साइबर ठगी की रकम इधर पहुंचती थी, उधर चंद मिनटों में नकदी निकल जाती थी। कमीशन काटकर बची रकम को यूएसडीटी के जरिए साइबर अपराधियों तक पहुंचाने वाले कथित ‘म्यूल अकाउंट’ नेटवर्क ने पुलिस की जांच में सनसनीखेज तस्वीर सामने रखी है। साइबर क्राइम पुलिस ने मेरठ के दौराला क्षेत्र के कैली गांव निवासी जीशान उर्फ शाहरूख और मौहम्मद हसन को गिरफ्तार कर इस नेटवर्क की एक कड़ी पकड़ी है। दोनों पर आरोप है कि वे अपने बैंक खाते साइबर ठगी की रकम मंगाने के लिए उपलब्ध कराते थे और रकम निकालकर अपने साथियों तक पहुंचाते थे।
पुलिस के मुताबिक, ‘प्रतिबिंब’ पोर्टल पर सामने आए संदिग्ध बैंक खातों की जांच ने इस पूरे खेल की परतें खोलनी शुरू कीं। जांच में ऐसे खातों का पता चला, जिनका कथित तौर पर साइबर धोखाधड़ी से हासिल रकम के हस्तांतरण और निकासी में इस्तेमाल किया जा रहा था।
गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से दो मोबाइल फोन, तीन चेकबुक, तीन पासबुक, तीन एटीएम कार्ड और एक फर्जी आधार कार्ड बरामद हुआ है। पुलिस अब बरामद दस्तावेजों और बैंक खातों के जरिए यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग जुड़े हैं और साइबर ठगी की रकम किन-किन खातों से होकर गुजरती थी।
पूछताछ में पुलिस के अनुसार आरोपियों ने बताया कि वे अपने साथियों को म्यूल बैंक खाते उपलब्ध कराते थे। इन खातों में साइबर ठगी की रकम आने के बाद उसे नकद निकालते और अपना कमीशन रखने के बाद शेष रकम यूएसडीटी के माध्यम से साथियों को भेज देते थे।
इस मामले में साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस आरोपियों के बैंक खातों, मोबाइल फोन और कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी खंगाल रही है।
