रिपोर्टर: सुदेश वर्मा
संरक्षित क्षेत्र में निर्माण को लेकर उठे सवाल
उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में ऐतिहासिक लाक्षागृह के आसपास स्थित संरक्षित क्षेत्र में कथित निर्माण कार्य को लेकर नया विवाद सामने आया है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित घोषित क्षेत्र में निर्माण कार्य जारी रहने के आरोप लगाए गए हैं। मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है और प्रशासनिक कार्रवाई पर भी सवाल उठ रहे हैं।
100 मीटर के दायरे में निर्माण पर है प्रतिबंध
जानकारी के अनुसार, एएसआई ने लाक्षागृह के आसपास 100 मीटर के दायरे को संरक्षित क्षेत्र घोषित कर रखा है। नियमों के तहत इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार के नए निर्माण पर रोक रहती है ताकि ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित रखा जा सके।
इसी प्रतिबंधित क्षेत्र में एक व्यक्ति द्वारा मकान निर्माण और मिट्टी भराव कराए जाने का आरोप लगाया गया है। शिकायत के बाद संबंधित विभाग ने मामले का संज्ञान लिया।
एएसआई ने निर्माण रोकने के दिए थे निर्देश
बताया जा रहा है कि एएसआई के संरक्षण सहायक ने 16 जुलाई को संबंधित निर्माण कार्य को तत्काल प्रभाव से रोकने के निर्देश जारी किए थे। इसके बावजूद निर्माण कार्य जारी रहने के आरोप सामने आ रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि विभाग द्वारा निर्माण पर रोक लगाई जा चुकी थी, तो उसके बाद भी काम कैसे चलता रहा, यह जांच का विषय है।
आरोपी के खिलाफ दर्ज है मुकदमा
मामले में जानकारी के अनुसार, राहुल नामक व्यक्ति के खिलाफ बिनौली थाने में संरक्षित क्षेत्र में कथित अवैध निर्माण को लेकर मुकदमा दर्ज किया गया है। इसके बावजूद निर्माण कार्य जारी रहने की बात सामने आने से प्रशासनिक कार्रवाई की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
हालांकि, इस मामले में संबंधित पक्ष का आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
जांच और कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की मांग की है। उनका कहना है कि ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा सभी की जिम्मेदारी है और संरक्षित क्षेत्र में नियमों का पालन सख्ती से कराया जाना चाहिए।
प्रशासन की कार्रवाई पर रहेगी नजर
यह मामला अब प्रशासन और संबंधित विभागों के लिए महत्वपूर्ण बन गया है। यदि निर्माण कार्य वास्तव में प्रतिबंधित क्षेत्र में हुआ है, तो जांच के बाद आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, यदि किसी प्रकार की अनुमति या अन्य तथ्य सामने आते हैं, तो स्थिति उसी आधार पर स्पष्ट होगी।
फिलहाल पूरे प्रकरण को लेकर स्थानीय लोगों की नजर प्रशासन और एएसआई की अगली कार्रवाई पर बनी हुई है।
