संवाददाता: शुभम सिंह
बांदा से बड़ी खबर
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत संचालित जननी सुरक्षा योजना के माध्यम से बांदा जिले में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा मिला है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, लोगों में सरकारी अस्पतालों में प्रसव कराने के प्रति जागरूकता बढ़ी है, जिससे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिली है।
दो माह में करीब 7 हजार संस्थागत प्रसव
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, 1 अप्रैल 2026 से 30 जून 2026 के बीच जिले में करीब 7,000 संस्थागत प्रसव कराए गए। अधिकारियों का कहना है कि यह जिले के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और इससे सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा मिला है।
प्रसूताओं को मिल रही प्रोत्साहन राशि
जननी सुरक्षा योजना के तहत पात्र महिलाओं को प्रसव के बाद आर्थिक सहायता भी दी जा रही है। योजना के अनुसार—
ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को ₹1,400
शहरी क्षेत्र की महिलाओं को ₹1,000
की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है।
जागरूकता से बढ़ा संस्थागत प्रसव
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि लगातार जागरूकता अभियानों के कारण अब अधिकतर गर्भवती महिलाएं घर की बजाय सरकारी अस्पतालों में सुरक्षित प्रसव को प्राथमिकता दे रही हैं। अस्पतालों में प्रसव, भोजन, दवाइयों और आवश्यक देखभाल की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
मातृ मृत्यु दर में कमी का दावा
विभाग ने सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि प्रदेश में मातृ मृत्यु दर में सुधार हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि संस्थागत प्रसव बढ़ने से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है।
निष्कर्ष
बांदा में जननी सुरक्षा योजना के तहत संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के प्रयास जारी हैं। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि योजना के माध्यम से अधिक महिलाएं सुरक्षित प्रसव के लिए सरकारी अस्पतालों तक पहुंच रही हैं, जिससे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिल रही है।
