रिपोर्टर: श्याम सिंह
औरैया। पर्यावरण संरक्षण और हरित भविष्य के उद्देश्य से समाजसेवी संगठन एक विचित्र पहल सेवा समिति द्वारा संचालित ‘जीवनधारा पौधारोपण अभियान’ के तहत रविवार को यमुना तट पर व्यापक पौधारोपण किया गया। अभियान के अंतर्गत दीर्घायु एवं पर्यावरण के लिए उपयोगी पौधों का रोपण कर उनके संरक्षण का संकल्प लिया गया।
समिति द्वारा यह अभियान 5 जून 2026 (विश्व पर्यावरण दिवस) से शुरू किया गया है, जिसका लक्ष्य 5,100 पौधे लगाने का है। अभियान लगातार जारी है और विभिन्न स्थानों पर पौधारोपण किया जा रहा है।
यमुना तट पर लगाए गए विभिन्न प्रजातियों के पौधे
रविवार सुबह आयोजित कार्यक्रम में यमुना तट पर पीपल, बरगद, अशोक, हरसिंगार, पकड़िया और चितवन सहित कई छायादार एवं पर्यावरण के लिए लाभकारी पौधे लगाए गए। इन पौधों का चयन उनके दीर्घकालिक पर्यावरणीय महत्व और जैव विविधता को ध्यान में रखते हुए किया गया।
आयोजकों ने बताया कि इन पौधों से भविष्य में क्षेत्र का पर्यावरण संतुलित होगा तथा हरियाली को बढ़ावा मिलेगा।
पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी सौंपी
पौधारोपण के साथ-साथ पौधों के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया गया। लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल और सिंचाई की जिम्मेदारी यमुना मैया के सेवादारों को सौंपी गई, ताकि पौधे सुरक्षित रूप से विकसित हो सकें।
समिति का कहना है कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका संरक्षण और नियमित देखभाल भी उतनी ही आवश्यक है।
पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश
कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी सुरक्षा का संकल्प लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए जनभागीदारी के साथ पौधारोपण अभियान को जनआंदोलन बनाना समय की आवश्यकता है।
समिति के पदाधिकारी रहे मौजूद
पौधारोपण कार्यक्रम में एक विचित्र पहल सेवा समिति के संस्थापक आनंदनाथ गुप्ता (एडवोकेट), संस्था के अध्यक्ष राजीव पोरवाल सहित समिति के अनेक पदाधिकारी, सदस्य और पर्यावरण प्रेमी उपस्थित रहे। सभी ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और भविष्य में भी ऐसे अभियान जारी रखने का संकल्प लिया।
हरित भविष्य की ओर एक सार्थक पहल
समिति द्वारा चलाया जा रहा जीवनधारा पौधारोपण अभियान पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ समाज में जागरूकता बढ़ाने का भी प्रयास है। आयोजकों ने नागरिकों से अपील की कि वे अपने आसपास अधिक से अधिक पौधे लगाएं और उनकी देखभाल कर आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं हरित वातावरण उपलब्ध कराने में अपना योगदान दें।
