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दलित बस्ती के विकास पर भ्रष्टाचार का ग्रहण! कोर्रा कनक में निर्माण कार्यों में धांधली के आरोप, ग्रामीणों ने खोला मोर्चा

नाले की जगह डाले जा रहे पाइप, घटिया सामग्री के इस्तेमाल का आरोप; प्रधान, सचिव और ठेकेदार की मिलीभगत से सरकारी धन के दुरुपयोग की शिकायत

असोथर (फतेहपुर)। सरकार जहां गांवों के विकास और मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं विकास खंड असोथर की ग्राम पंचायत कोर्रा कनक में विकास कार्यों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सामने आए हैं। दलित बस्ती में कराए जा रहे निर्माण कार्यों को लेकर ग्रामीणों ने खुलकर मोर्चा खोल दिया है। उनका आरोप है कि निर्माण कार्यों में निर्धारित मानकों की अनदेखी कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है और जिम्मेदार अधिकारी तथा जनप्रतिनिधि पूरे मामले पर आंखें मूंदे हुए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि दलित बस्ती में जल निकासी की समस्या को दूर करने के लिए पक्के नाले का निर्माण प्रस्तावित था, लेकिन मौके पर नाले के स्थान पर ह्यूम पाइप डालकर काम पूरा दिखाने का प्रयास किया जा रहा है। इतना ही नहीं, निर्माण कार्य में घटिया गुणवत्ता की सामग्री इस्तेमाल किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। स्थानीय लोगों का दावा है कि निर्माण में मानक के अनुरूप सामग्री का प्रयोग नहीं किया जा रहा और गुणवत्ता से समझौता कर सरकारी धन को ठिकाने लगाने की कोशिश की जा रही है।

नियमों को ताक पर रखकर कराया जा रहा निर्माण

ग्रामीणों के मुताबिक निर्माण कार्य में तीसरे दर्जे की ईंटों और निम्न गुणवत्ता वाले मसाले का इस्तेमाल किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं कराई गई तो कुछ ही समय में यह निर्माण कार्य क्षतिग्रस्त हो जाएगा और सरकारी धन व्यर्थ चला जाएगा।

स्थानीय निवासियों ने बताया कि दलित बस्ती में लंबे समय से जलभराव की समस्या बनी हुई है। लोगों को उम्मीद थी कि नाला बनने से समस्या का स्थायी समाधान होगा, लेकिन जिस प्रकार का कार्य कराया जा रहा है, उससे समस्या खत्म होने के बजाय और बढ़ सकती है।

विरोध करने पर ग्रामीणों से अभद्रता का आरोप

मामले को लेकर ग्रामीणों में तब और अधिक आक्रोश फैल गया जब उन्होंने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायत करने और काम की जांच कराने की मांग उठाने पर उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया।

ग्रामीणों का कहना है कि जब उन्होंने निर्माण कार्य में अनियमितताओं की बात कही तो उन्हें चुप रहने की नसीहत दी गई और उनकी बातों को गंभीरता से लेने के बजाय दबाने का प्रयास किया गया। इससे लोगों में नाराजगी और बढ़ गई है।

प्रधान, सचिव और ठेकेदार पर मिलीभगत के आरोप

स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि ग्राम पंचायत स्तर पर प्रधान, सचिव और ठेकेदार की मिलीभगत से पूरे मामले को अंजाम दिया जा रहा है। ग्रामीणों का दावा है कि विकास कार्यों के नाम पर आने वाले सरकारी बजट का सही उपयोग नहीं हो रहा और कागजों में विकास दिखाकर धन का दुरुपयोग किया जा रहा है।

हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए तो पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकती है।

‘सफेदपोशों के संरक्षण’ का भी आरोप

ग्रामीणों ने कुछ प्रभावशाली लोगों और कथित राजनीतिक संरक्षण का भी मुद्दा उठाया है। उनका आरोप है कि हर बार शिकायतें होने के बावजूद कार्रवाई नहीं होती क्योंकि कुछ प्रभावशाली लोगों का संरक्षण मिलने के कारण जांच आगे नहीं बढ़ पाती।

ग्रामीणों का कहना है कि पहले भी कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन जांच शुरू होने से पहले ही मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग

दलित बस्ती के लोगों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के उच्च अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों ने मांग की है कि निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराई जाए और यदि अनियमितता पाई जाए तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।

ग्रामीणों की प्रमुख मांगें हैं—

  • निर्माण कार्य की गुणवत्ता की मौके पर जांच कराई जाए।
  • उपयोग की गई सामग्री और कार्य की तकनीकी जांच कराई जाए।
  • सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोपों की निष्पक्ष जांच हो।
  • दोषी पाए जाने पर प्रधान, सचिव, ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
  • ग्रामीणों के साथ अभद्रता करने वालों पर भी कानूनी कार्रवाई हो।

प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी निगाहें

फिलहाल कोर्रा कनक का यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इन आरोपों को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या वास्तव में निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होती है, या फिर यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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