Homeउत्तर प्रदेशटीबी मुक्त भारत अभियान को मिली नई मजबूती, 65 औद्योगिक इकाइयों ने...

टीबी मुक्त भारत अभियान को मिली नई मजबूती, 65 औद्योगिक इकाइयों ने मरीजों की सहायता का लिया संकल्प

मुजफ्फरनगर में टीबी उन्मूलन अभियान को जनसहभागिता से मजबूत बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत आयोजित एक वर्चुअल बैठक में जिले की 65 औद्योगिक इकाइयों ने क्षय रोग (टीबी) से प्रभावित मरीजों के सहयोग के लिए आगे आने की प्रतिबद्धता जताई। प्रशासन का मानना है कि उद्योग जगत की सक्रिय भागीदारी से टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।

100 दिवसीय अभियान के तहत आयोजित हुई बैठक

मंगलवार को मुख्य विकास अधिकारी कमल किशोर कंडारकर की अध्यक्षता में 100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत एक वर्चुअल बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले की विभिन्न औद्योगिक इकाइयों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

बैठक का मुख्य उद्देश्य उद्योग जगत को टीबी उन्मूलन अभियान से जोड़ना तथा मरीजों के लिए पोषण सहायता सुनिश्चित करने के प्रयासों को मजबूत बनाना था। अधिकारियों ने उद्योग प्रतिनिधियों को अभियान की वर्तमान स्थिति और सामाजिक सहयोग की आवश्यकता के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद

बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील तेवतिया, जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. लोकेश गुप्ता और क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी गितेश चंद सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे।

अधिकारियों ने बताया कि टीबी एक गंभीर लेकिन उपचार योग्य बीमारी है। समय पर जांच, नियमित उपचार और उचित पोषण मिलने पर मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकते हैं। इसी उद्देश्य से सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से मरीजों को सहायता उपलब्ध करा रही है।

निक्षय मित्र योजना से जुड़ने की अपील

बैठक के दौरान उद्योग प्रतिनिधियों को ‘निक्षय मित्र’ योजना की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि इस योजना के अंतर्गत कोई भी उद्योग, संस्था, संगठन या सामाजिक समूह टीबी मरीजों को गोद लेकर उनके लिए पोषण सहायता उपलब्ध करा सकता है।

निक्षय मित्र बनने वाले व्यक्ति या संस्थाएं मरीजों को नियमित रूप से पोषण पोटली प्रदान करती हैं, जिससे उपचार के दौरान उनके स्वास्थ्य में सुधार और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ावा मिलता है। यह पहल मरीजों के लिए मानसिक और सामाजिक समर्थन का भी माध्यम बनती है।

समाज के सहयोग से ही संभव होगा लक्ष्य

मुख्य विकास अधिकारी कमल किशोर कंडारकर ने कहा कि टीबी मुक्त भारत का सपना केवल सरकारी प्रयासों से पूरा नहीं हो सकता। इसके लिए समाज के प्रत्येक वर्ग, संस्थान और उद्योग जगत की भागीदारी आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) और सामाजिक दायित्व की भावना के तहत उद्योगों को इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। यदि अधिक से अधिक संस्थाएं आगे आती हैं तो जिले में टीबी मरीजों को बेहतर सहायता उपलब्ध कराई जा सकेगी।

पोषण सहायता क्यों है जरूरी?

जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. लोकेश गुप्ता ने उद्योग प्रतिनिधियों को पोषण सहायता के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि टीबी के उपचार में दवाइयों के साथ-साथ संतुलित और पौष्टिक आहार की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

उन्होंने कहा कि कई मरीज आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं, जिसके कारण उन्हें पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता। ऐसे में पोषण पोटली जैसी सहायता उनके स्वास्थ्य सुधार में महत्वपूर्ण योगदान देती है। बेहतर पोषण मिलने से मरीजों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और उपचार के सकारात्मक परिणाम सामने आते हैं।

औद्योगिक क्षेत्र ने दिया सहयोग का भरोसा

बैठक के दौरान क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी गितेश चंद ने भी अभियान के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य संबंधी सामाजिक अभियानों में उद्योग जगत की भागीदारी हमेशा सकारात्मक परिणाम लेकर आती है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जिले की औद्योगिक इकाइयां न केवल पोषण सहायता उपलब्ध कराएंगी बल्कि जागरूकता बढ़ाने में भी सहयोग करेंगी। इससे समाज में टीबी के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और मरीजों को समय पर उपचार प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

65 औद्योगिक इकाइयों ने जताई सहमति

बैठक के अंत में जिले की सभी 65 औद्योगिक इकाइयों के प्रतिनिधियों ने टीबी मरीजों के लिए पोषण पोटलियों की व्यवस्था करने और अभियान में सक्रिय सहयोग देने का आश्वासन दिया।

प्रशासन का मानना है कि इस सहयोग से जिले में टीबी मरीजों तक अधिक प्रभावी ढंग से सहायता पहुंचाई जा सकेगी। साथ ही समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने और टीबी उन्मूलन के प्रयासों को नई गति मिलेगी।

टीबी मुक्त भारत की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

विशेषज्ञों का मानना है कि टीबी जैसी बीमारी के खिलाफ लड़ाई केवल चिकित्सा व्यवस्था तक सीमित नहीं है। इसके लिए सामाजिक सहयोग, जागरूकता, पोषण सहायता और सामुदायिक भागीदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

मुजफ्फरनगर में उद्योग जगत की भागीदारी से शुरू हुई यह पहल अन्य जिलों के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण बन सकती है। यदि विभिन्न क्षेत्रों के लोग और संस्थाएं इस अभियान से जुड़ते हैं तो देश को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य और अधिक मजबूत आधार प्राप्त कर सकता है।

निष्कर्ष

मुजफ्फरनगर में आयोजित वर्चुअल बैठक ने यह स्पष्ट कर दिया है कि टीबी उन्मूलन केवल स्वास्थ्य विभाग का कार्य नहीं बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। 65 औद्योगिक इकाइयों द्वारा सहयोग का आश्वासन मिलने से प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को नई ऊर्जा मिली है। उम्मीद की जा रही है कि इस पहल से टीबी मरीजों को बेहतर पोषण सहायता मिलेगी और जिले में टीबी मुक्त भारत अभियान को और अधिक मजबूती प्राप्त होगी।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments