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वन विभाग द्वारा रास्ता बंद किए जाने पर ग्रामीणों में रोष, SDM को सौंपा ज्ञापन

रिपोर्ट : राकेश कुमार

उत्तर प्रदेश के Bijnor जनपद की धामपुर तहसील क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत अमीनाबाद के ग्रामीणों में उस समय भारी नाराजगी देखने को मिली, जब वन विभाग द्वारा पुराने कृषि मार्ग को बंद किए जाने के विरोध में ग्रामीणों ने उपजिलाधिकारी (SDM) को ज्ञापन सौंपा।

ग्रामीणों का कहना है कि रास्ता बंद होने से खेती-किसानी और पशुपालन दोनों बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।

आजादी से पहले से इस्तेमाल हो रहा था रास्ता

ग्रामीणों के अनुसार ग्राम अमीनाबाद, ब्लॉक स्योहारा स्थित यह मार्ग वर्षों से ग्रामीणों के उपयोग में रहा है।

लोगों का कहना है कि यह रास्ता वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत आता है और इसी मार्ग से ग्रामीण अपने खेतों तक पहुंचते थे।

इसके साथ ही पशुओं के लिए चारा लाने और कृषि कार्यों के लिए भी इसी रास्ते का इस्तेमाल किया जाता था।

रास्ता बंद होने से बढ़ी परेशानी

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वन विभाग द्वारा रास्ता बंद कर दिए जाने से गांव में गंभीर समस्या पैदा हो गई है।

लोगों का कहना है कि खेतों तक पहुंचने के लिए कोई वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध नहीं है, जिससे खेती का कार्य प्रभावित हो रहा है।

इसके अलावा पशुओं के लिए चारा लाना भी मुश्किल हो गया है।

पशुओं की मौत का दावा

ग्रामीणों ने बताया कि चारे की कमी के कारण कई पशुओं की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य पशु गंभीर स्थिति में हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द रास्ता नहीं खोला गया तो हालात और गंभीर हो सकते हैं।

महीनों से लगा रहे अधिकारियों के चक्कर

ग्रामीणों के मुताबिक वे 5 दिसंबर 2025 से लगातार वन विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि 17 जनवरी को नायब तहसीलदार और डिप्टी रेंजर की मौजूदगी में मार्ग खुलवाने का आश्वासन भी दिया गया था।

हालांकि ग्रामीणों का आरोप है कि अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला।

बड़ी संख्या में तहसील पहुंचे ग्रामीण

गुरुवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण तहसील पहुंचे और एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर मानवीय आधार पर हस्तक्षेप करने की मांग की।

ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द रास्ता खुलवाने और समस्या का समाधान कराने की अपील की।

ग्रामीणों में बढ़ रहा आक्रोश

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो उन्हें आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से किसानों और पशुपालकों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई करने की मांग की है।

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