रिपोर्ट – एकरार खान

गाजीपुर। जिले में ग्रामीणों और सेना से रिटायर्ड एक जवान की पहल ने मिसाल कायम कर दी है। यहां लोगों ने सरकारी मदद का इंतजार करने के बजाय खुद ही जनसहयोग से मगई नदी पर पक्का पुल बनाना शुरू किया, जो अब लगभग तैयार हो चुका है।
यह पुल कयामपुर छावनी सहित आसपास के कई गांवों को जोड़ेगा और हजारों लोगों के आवागमन को आसान बनाएगा। गुरुवार को इस जनहित कार्य में समाजवादी पार्टी के राज्य कार्यकारिणी सदस्य राजकुमार पांडेय ने भी आर्थिक सहयोग देकर ग्रामीणों का हौसला बढ़ाया।
राजकुमार पांडेय ने बताया कि ग्रामीणों और पुल निर्माण समिति के अनुरोध पर उन्होंने इस नेक कार्य में सहयोग किया। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों का यह प्रयास सरकारी व्यवस्था को आईना दिखाने का काम करता है और यह साबित करता है कि सामूहिक इच्छाशक्ति से बड़े बदलाव संभव हैं।
इस अनोखी पहल की शुरुआत सेना से रिटायर्ड रविंद्र यादव ने की, जिन्होंने पुल निर्माण के लिए 10 लाख रुपये का योगदान दिया। इसके बाद लगातार लोगों का सहयोग मिलता गया। 25 फरवरी 2024 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव ने पुल का शिलान्यास किया था।
करीब 105 फीट लंबे इस पुल का निर्माण कार्य अब अंतिम चरण में है। इसकी डिजाइनिंग और निर्माण कार्य इंजीनियरिंग कोर से रिटायर्ड रविंद्र यादव और एक आर्किटेक्ट की देखरेख में किया गया।
स्थानीय लोगों के अनुसार, आजादी के बाद से ही पुल की मांग की जा रही थी, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। मजबूरन लोग बांस के अस्थायी पुल से आवागमन करते थे और बाढ़ के समय नाव का सहारा लेना पड़ता था।
पुल के अभाव में जिला मुख्यालय की दूरी 10-12 किलोमीटर बढ़ जाती थी। जहां थाना मात्र 3 किलोमीटर दूर है, वहीं सड़क मार्ग से 15 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता था। इस पुल के बन जाने से अब लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।
गौरतलब है कि यह इलाका जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के गांव के पास स्थित है।
ग्रामीणों की यह पहल बिहार के “माउंटेन मैन” दशरथ मांझी की याद दिलाती है, जिन्होंने अकेले दम पर पहाड़ काटकर रास्ता बना दिया था। गाजीपुर के ग्रामीणों का यह प्रयास भी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन रहा है।

