रिपोर्ट – कबीर

मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर के तितावी क्षेत्र में हुआ दर्दनाक सड़क हादसा महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक खुशहाल परिवार पर टूटा ऐसा कहर था, जिसने पूरे इलाके को सन्न कर दिया। हैदरनगर जलालपुर गांव की उस सूनी चौखट पर आज भी मातम पसरा है, जहां दो दिन पहले तक बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं। लेकिन अब वहां सिर्फ सन्नाटा है—और उस खौफनाक मंजर की गूंज, जिसने एक ही पल में सब कुछ छीन लिया।
शुक्रवार को जब उत्तर प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री नरेंद्र कश्यप पीड़ित परिवार के घर पहुंचे, तो माहौल गमगीन हो उठा। मंत्री खुद जमीन पर बैठकर शोकाकुल परिजनों के बीच उनका दुख बांटते नजर आए। हादसे की दास्तां सुनकर उनकी आंखें भी नम हो गईं। उन्होंने परिजनों को ढांढस बंधाते हुए भरोसा दिलाया कि इस विपदा की घड़ी में सरकार उनके साथ मजबूती से खड़ी है।
मंत्री नरेंद्र कश्यप ने तत्काल राहत के तौर पर पीड़ित परिवार को 1 लाख रुपये की आर्थिक सहायता सौंपी। हालांकि उन्होंने साफ कहा कि यह मदद उस अपार दुख की भरपाई नहीं कर सकती, जो इस परिवार ने झेला है, लेकिन सरकार हरसंभव सहयोग सुनिश्चित करेगी और परिवार को बेसहारा नहीं छोड़ा जाएगा।
हादसे की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं। मंत्री ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री को घटना की पूरी जानकारी दे दी है। मौके से ही जिलाधिकारी को सख्त निर्देश दिए गए कि पीड़ित परिवार को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में किसी तरह की देरी या कागजी अड़चन न हो। साथ ही राहत राशि बढ़ाने के लिए भी तत्काल प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया है।
दरअसल, दो दिन पहले हैदरनगर पुल के पास एक बेलगाम बस ने बाइक सवार परिवार को कुचल दिया था। टक्कर इतनी भीषण थी कि पति-पत्नी और उनके दो मासूम बच्चों—एक बेटा और एक बेटी—की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। हादसे के बाद जब एक ही चिता पर पूरे परिवार का अंतिम संस्कार हुआ, तो हर आंख नम थी और पूरा जिला गहरे सदमे में डूब गया।
आज भी गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा है। हर चेहरा गमगीन है और हर जुबान पर बस एक ही सवाल—आखिर उन मासूमों का क्या कसूर था? यह सवाल अब भी हवा में तैर रहा है, जिसका जवाब शायद किसी के पास नहीं।

