रिपोर्ट – शुभम सिंह

बांदा। बुंदेलखंड की जीवनरेखा कही जाने वाली केन नदी इन दिनों खनन माफियाओं के लालच की भेंट चढ़ रही है। ताजा मामला पैलानी तहसील के खप्टिहा कलां का है, जहां खंड संख्या 356/2 में स्वीकृत पट्टे की आड़ में नदी का ‘कत्ल’ किया जा रहा है। लक्षिता इंटरप्राइजेज (प्रोपराइटर: सुभाष सिंह) द्वारा संचालित इस खदान में नियम-कायदों को ताक पर रखकर नदी की बीच जलधारा में भारी-भरकम पोकलैंड मशीनें उतारी गई हैं।
तस्वीरें दे रही गवाही, प्रशासन की आंखों पर पट्टी
सोशल मीडिया पर वायरल और जीपीएस लोकेशन (25.6757° N, 80.3741° E) के साथ पुख्ता वीडियो साक्ष्यों ने जिला खनिज विभाग के दावों की पोल खोल दी है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे विशालकाय मशीनें पानी के बीचों-बीच से बालू निकाल रही हैं। एनजीटी (NGT) और खनन नियमावली के अनुसार, जलधारा से छेड़छाड़ या पानी के भीतर मशीनी खनन पूरी तरह प्रतिबंधित है, लेकिन यहां कानून का डर नहीं, बल्कि माफिया का रसूख बोल रहा है।
क्या है ‘अवैध’ खेल का तरीका?
प्रतिबंधित मशीनों का तांडव: नियमानुसार केवल मैन्युअल या सीमित मशीनी खनन की अनुमति होती है, लेकिन यहां आधा दर्जन से अधिक पोकलैंड मशीनें दिन-रात खुदाई कर रही हैं।
राजस्व की बड़ी चपत: सूत्रों की मानें तो पट्टे की सीमा से और तय गहराई से ज्यादा खुदाई कर सरकार को करोड़ों के राजस्व का चूना लगाया जा रहा है।
खनिज अधिकारी की चुप्पी पर उठे सवाल
हैरानी की बात यह है कि जिस स्थान पर यह तांडव चल रहा है, वहां से जिला मुख्यालय और तहसील प्रशासन की दूरी छिपी नहीं है। इसके बावजूद जिला खनिज अधिकारी और संबंधित अमले की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। क्या विभाग को इन मशीनों की गूंज सुनाई नहीं दे रही? या फिर ‘सुविधा शुल्क’ के खेल ने जिम्मेदार अधिकारियों की कलम की स्याही सुखा दी है?
“नदी की जलधारा से खनन करना संगीन अपराध है। यदि खप्टिहा कलां में पोकलैंड मशीनों का प्रयोग हो रहा है, तो यह सीधे तौर पर पट्टा शर्तों का उल्लंघन है। मामले की जांच कर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।”
— (स्थानीय पर्यावरण प्रेमी)
बुंदेलखंड का पारिस्थितिकी तंत्र खतरे में
केन नदी में अवैध खनन के कारण जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है। जलीय जीवों का अस्तित्व समाप्त हो रहा है और आने वाले समय में यह क्षेत्र भीषण जल संकट की चपेट में आ सकता है। यदि शासन ने तत्काल दखल नहीं दिया, तो खप्टिहा कलां की यह ‘लूट’ बांदा के लिए भविष्य की आपदा बन जाएगी।

