रिपोर्ट – कबीर

मुज़फ्फरनगर, बुढ़ाना। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) बुढ़ाना में शनिवार को स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली खुलकर सामने आ गई, जब इलाज के लिए पहुंचे मरीजों का गुस्सा फूट पड़ा। डॉक्टरों के समय पर न पहुंचने, जांच सेवाओं में लापरवाही और घंटों इंतजार के बाद भी इलाज न मिलने से नाराज मरीजों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया।
अस्पताल में कई डॉक्टरों की कुर्सियां खाली मिलने से मरीजों का आक्रोश और भड़क गया। दूर-दराज गांवों से आए लोगों का कहना था कि वे पिछले तीन-चार दिनों से लगातार अस्पताल के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन न तो सही समय पर डॉक्टर मिलते हैं और न ही जांच की समुचित व्यवस्था है।
मरीजों ने आरोप लगाया कि खून की जांच के लिए घंटों लाइन में लगने के बावजूद काउंटर समय से पहले ही बंद कर दिया जाता है, जिससे उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ता है। हालात इस कदर बिगड़े कि महिलाओं समेत कई मरीजों ने अस्पताल में विरोध जताते हुए जमकर नारेबाजी की।

इसी बीच एक मरीज मुनेश ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि जब उन्होंने एक डॉक्टर से देरी का कारण पूछा और समय पर आने की बात कही, तो डॉक्टर ने न सिर्फ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया, बल्कि कहा— “तेरा बाप तनख्वाह नहीं देता मुझे।” इस बयान के बाद मरीजों में भारी रोष फैल गया और माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया।
हंगामे की सूचना मिलते ही अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में कर्मचारियों ने स्थिति को संभालने की कोशिश की, लेकिन तब तक मरीजों का गुस्सा साफ तौर पर व्यवस्था पर सवाल खड़े कर चुका था।
वहीं, मामले के तूल पकड़ने के बाद सीएचसी प्रभारी प्रणव तेवतिया ने प्रेस नोट जारी कर अपना पक्ष रखा। उन्होंने हंगामा कर रही महिलाओं और मरीजों के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि अस्पताल में सभी व्यवस्थाएं सुचारु रूप से संचालित की जा रही हैं और कुछ लोग अनावश्यक रूप से माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों और मरीजों ने स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि अगर जल्द सुधार नहीं हुआ तो आम जनता को सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं से भरोसा उठ जाएगा।



