रिपोर्ट – कबीर

मुज़फ्फरनगर। जनपद में निजी स्कूलों की बढ़ती मनमानी और किताबों के नाम पर अभिभावकों से की जा रही कथित लूट के खिलाफ अब आवाज़ तेज़ होने लगी है। भारतीय किसान मजदूर (संयुक्त मोर्चा) के बैनर तले जिलाध्यक्ष शाहिद राजा के नेतृत्व में अभिभावकों ने बेसिक शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर सख्त कार्रवाई की मांग उठाई है।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही प्राइवेट स्कूलों ने अपनी-अपनी मनमर्जी चलानी शुरू कर दी है। बच्चों के अगली कक्षा में प्रवेश लेते ही अभिभावकों पर महंगी किताबें खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है। आरोप है कि अधिकांश स्कूलों ने अपने तय बुक स्टोर निर्धारित कर रखे हैं, जहां से ही किताबें खरीदना अनिवार्य कर दिया जाता है।
अभिभावकों का कहना है कि जिन किताबों की वास्तविक कीमत बेहद कम होती है, उन्हीं को कई गुना अधिक दामों पर बेचा जा रहा है। उदाहरण के तौर पर जो किताब बाजार या सरकारी व्यवस्था में करीब 10 रुपये में उपलब्ध है, वही किताब स्कूलों के माध्यम से 70 से 80 रुपये तक में दिलवाई जा रही है। इस स्थिति ने खासतौर पर गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों की कमर तोड़ दी है।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि आज के समय में एक आम आदमी पहले ही महंगाई और रोज़मर्रा की जरूरतों से जूझ रहा है। इसके बावजूद वह अपने बच्चों को शिक्षित करने का सपना देखता है, लेकिन स्कूलों की इस मनमानी के चलते शिक्षा अब उसके लिए बोझ बनती जा रही है। हालात ऐसे बन रहे हैं कि यदि जल्द ही इस पर रोक नहीं लगी, तो कई अभिभावक मजबूरी में अपने बच्चों की पढ़ाई छुड़ाने को विवश हो जाएंगे।
भारतीय किसान मजदूर (संयुक्त मोर्चा) ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्द इस मामले में हस्तक्षेप कर ठोस कार्रवाई नहीं की, तो संगठन व्यापक स्तर पर आंदोलन करने को बाध्य होगा। वहीं, बेसिक शिक्षा अधिकारी से मांग की गई है कि ऐसे सभी निजी स्कूलों के खिलाफ जांच कर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और समानता सुनिश्चित हो सके।



