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हसदेव क्षेत्र में एटक को नई ऊर्जा, कई यूनियन प्रतिनिधियों ने जताया भरोसा

हसदेव (एसईसीएल), 16 जुलाई — हसदेव क्षेत्र की ट्रेड यूनियन राजनीति में आज एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला, जब विभिन्न यूनियनों से जुड़े अनुभवी श्रमिक प्रतिनिधियों ने अपनी पूर्व की सदस्यता छोड़कर एटक (AITUC) का दामन थामा। यह केवल संगठन परिवर्तन नहीं, बल्कि नेतृत्व के प्रति बदलते विश्वास और श्रमिक हितों की रक्षा के लिए मजबूत वैचारिक प्रतिबद्धता का प्रतीक बनकर सामने आया।

लंबे समय से कार्यस्थलों पर सक्रिय श्रमिक नेताओं—माइनिंग सरदार, वेल्डर, टेलीफोन लाइनमैन और इलेक्ट्रिशियन—ने एटक मंच से अपनी नई पारी की शुरुआत की। इन प्रतिनिधियों ने अपने निर्णय को विचारधारा और संगठन की दिशा से जुड़ा बताते हुए कहा कि एटक आज उन गिने-चुने संगठनों में है, जो ज़मीनी स्तर पर श्रमिकों की लड़ाई ईमानदारी से लड़ रहा है।

इस अवसर पर राजकुमार पांडे, शकील अहमद, नाजिम खान, लखन दास, संतोष कुमार, ध्यान सिंह और शिवशंकर जैसे प्रतिनिधियों ने एचएमएस, बीएमएस और सीआईटीयू जैसी यूनियनों को छोड़कर एटक की सदस्यता ली। सभी ने एक स्वर में कहा कि अब समय है कि श्रमिक अपने नेतृत्व का चयन सोच-समझकर करें, और एटक वह मंच है जो उनकी उम्मीदों पर खरा उतरता है।

इस ऐतिहासिक क्षण को चिह्नित करते हुए एक संगठित बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें एटक के वरिष्ठ पदाधिकारी डी.एन. सिंह, आर.के. गिरी, रामचरण यादव, नूर मोहम्मद, मनोज सिंह, पप्पू यादव, वेद प्रकाश चौरसिया, राजेश सिंह, ओम प्रकाश यादव, गौतम पारीदा और ललित कुमार उपस्थित रहे। पदाधिकारियों ने नए साथियों का आत्मीय स्वागत करते हुए इसे संगठन की मजबूती के लिए उत्साहवर्धक क्षण बताया।

बैठक में वक्ताओं ने दो टूक कहा कि आज का यह कदम सिर्फ सदस्यता ग्रहण नहीं, बल्कि एक आंदोलन की शुरुआत है। अब संघर्ष केवल ज्ञापनों और मांगपत्रों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि एक संगठित और सजग श्रमिक वर्ग के रूप में प्रबंधन और प्रशासन के समक्ष न्याय और अधिकार की आवाज बुलंद की जाएगी।

एटक नेतृत्व ने स्पष्ट रूप से कहा कि संगठन उन सभी श्रमिकों का स्वागत करता है जो ईमानदारी, प्रतिबद्धता और संघर्ष के मूल सिद्धांतों में विश्वास रखते हैं। “नेतृत्व का असली मूल्य भाषणों में नहीं, ज़मीन पर मजदूरों के साथ खड़े होने में है,” यह संदेश सभा में बार-बार गूंजा।

हसदेव क्षेत्र में यह घटनाक्रम एक स्पष्ट संकेत है कि अब श्रमिक वर्ग जागरूक हो चुका है। वह न सिर्फ़ सोच रहा है, बल्कि अपने अधिकारों के लिए संगठित होकर निर्णायक दिशा में कदम भी उठा रहा है — और एटक उनकी इस नई यात्रा में अग्रिम साथी के रूप में उभर कर सामने आया है।

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