मुज़फ्फरनगर | ब्यूरो – कबीर
मुज़फ्फरनगर के जानसठ रोड स्थित गांव लाडपुर में शनिवार का दिन देशभक्ति, भावनाओं और शहादत के सम्मान को समर्पित रहा। यहां श्रीराम गार्डन में शहीद आशीष स्वामी के 30वें जन्मदिवस पर आयोजित श्रद्धांजलि समारोह और कवि सम्मेलन ने उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया। कार्यक्रम में जहां ओजस्वी कविताओं ने राष्ट्रप्रेम का जज़्बा जगाया, वहीं शहीद की वीरांगना पत्नी शिवि स्वामी के शब्दों ने हर किसी की आंखें नम कर दीं।कार्यक्रम का आयोजन ‘कलमपुत्र काव्यकला मंच एवं पत्रिका’ के तत्वावधान में किया गया। इस अवसर पर शहीद आशीष स्वामी को श्रद्धासुमन अर्पित किए गए और उनके बलिदान को याद किया गया। आयोजन की सबसे खास बात यह रही कि इसकी कमान स्वयं उनकी पत्नी शिवि स्वामी ने संभाली, जो अपने पति की शहादत को समाज के लिए प्रेरणा का माध्यम बना रही हैं।दीप प्रज्वलन के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभकार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि बेसिक शिक्षा अधिकारी संदीप कुमार, विशिष्ट अतिथि क्षेत्रीय प्रदेश उपाध्यक्ष मानसिंह गोस्वामी और सीओ खतौली रूपाली राय चौधरी द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि सत्यपाल ‘सत्यम’ ने की, जबकि मंच संचालन साहित्यकार, पत्रकार एवं इतिहासकार चरणसिंह स्वामी ने किया।कार्यक्रम की शुरुआत बाल कवयित्री गुंजन स्वामी की सरस्वती वंदना से हुई। उनकी प्रस्तुति ने पूरे माहौल को आध्यात्मिक और भावनात्मक रंग में रंग दिया।कवियों की ओजस्वी प्रस्तुतियों से गूंजा मंचश्रद्धांजलि समारोह में उपस्थित कवियों ने वीरता, राष्ट्रभक्ति और शहादत को समर्पित अपनी कविताओं से कार्यक्रम को ऊर्जा और भावनाओं से भर दिया। कवि कल्पश ‘कपलश’, रामचंद्र वैश्य, चंद्रशेखर मयूर, सरोज दूबे और गुलाब सिंह ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं का दिल जीत लिया।कवियों की रचनाओं में देशप्रेम, सैनिकों का त्याग और मातृभूमि के प्रति समर्पण की भावना स्पष्ट दिखाई दी। हर कविता के साथ तालियों की गूंज पूरे परिसर में सुनाई देती रही।वीरांगना शिवि स्वामी के शब्दों ने किया भावुककार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण तब आया जब शहीद आशीष स्वामी की पत्नी शिवि स्वामी मंच पर अपने विचार व्यक्त करने पहुंचीं। उन्होंने बेहद भावुक शब्दों में कहा कि एक सैनिक केवल अपने परिवार का सदस्य नहीं होता, बल्कि पूरे देश की सुरक्षा का प्रहरी होता है।उन्होंने कहा,“शहीद होने के बाद सैनिक के परिवार को केवल संवेदना नहीं, बल्कि सम्मान और सहयोग की जरूरत होती है। समाज और सरकार दोनों की जिम्मेदारी है कि वीरांगनाओं को अकेला महसूस न होने दें।”उनके शब्द सुनकर कार्यक्रम में मौजूद कई लोगों की आंखें नम हो गईं।विधवाओं के प्रति सोच बदलने की अपीलशिवि स्वामी ने समाज में विधवाओं के प्रति व्याप्त संकीर्ण मानसिकता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक वीरांगना को दया की नहीं बल्कि सम्मान की आवश्यकता होती है।उन्होंने अपने उपन्यास ‘आशिवी — शहीद से एक पत्नी की शिकायत’ का जिक्र करते हुए कहा कि यह केवल उनकी निजी भावनाओं का दस्तावेज नहीं, बल्कि उन तमाम वीरांगनाओं की आवाज है जो अपने दर्द को चुपचाप सहती रहती हैं।उन्होंने कहा,“शहीद कभी मरते नहीं हैं, वे हमेशा देशवासियों के दिलों में जीवित रहते हैं।”कविताओं ने भरा जोशकार्यक्रम के अध्यक्षीय संबोधन में वरिष्ठ कवि सत्यपाल ‘सत्यम’ ने अपनी कविता ‘युद्धवीर तैयार रहो’ सुनाकर युवाओं में जोश भर दिया। वहीं कवि रामचंद्र वैश्य ने ‘शहीदों को शत-शत नमन कर रहा हूं’ कविता के माध्यम से शहीद आशीष स्वामी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।कविता पाठ के दौरान पूरा वातावरण देशभक्ति के रंग में रंग गया। लोगों ने तालियों और नारों के साथ कवियों का उत्साहवर्धन किया।बड़ी संख्या में पहुंचे लोगकार्यक्रम में भाजपा नेता अभिषेक चौधरी, समाजवादी पार्टी के प्रदेश सचिव इलम सिंह, प्रधान सुंदरलाल, एडवोकेट राजवीर सिंह, ओमपाल सिंह चौहान, वेदपाल सिंह, भाजपा नेत्री दीप्ति चौधरी, अनिल कुमार स्वामी, राजवीर डागर, सुधीर स्वामी, मुरारी लाल स्वामी, मुनेंद्र विपिन और कृष्णपाल स्वामी समेत बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी, सामाजिक कार्यकर्ता और गणमान्य लोग मौजूद रहे।लोगों ने शहीद आशीष स्वामी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि देश हमेशा अपने वीर सपूतों के बलिदान का ऋणी रहेगा।शहादत को प्रेरणा में बदलने का प्रयासयह आयोजन केवल एक जन्मदिवस समारोह नहीं था, बल्कि शहादत, सम्मान और राष्ट्रप्रेम का संदेश देने वाला मंच बन गया। वीरांगना शिवि स्वामी की दृढ़ता और उनके विचारों ने लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि शहीदों के परिवारों के प्रति समाज की जिम्मेदारी कितनी बड़ी है।मुज़फ्फरनगर में आयोजित यह कार्यक्रम देशभक्ति, संवेदनाओं और सम्मान का ऐसा संगम बना, जिसने हर व्यक्ति के दिल पर गहरी छाप छोड़ी।
