रिपोर्ट – सन्दीप वर्मा

बाराबंकी। सपा का पीडीए बिल्कुल फर्जी साबित हो रहा है अखिलेश यादव शास्त्रों में इसे ही फरेब और मक्कारी कहा गया है कि संवैधानिक रूप से आपको सिर्फ हिंदू समाज में ही पिछड़ा, दलित और सवर्ण दिखता है, लेकिन मुस्लिम सहित अन्य अल्पसंख्यक समाज में नही हैं यह सट्टी बाज़ार स्थित कार्यालय पर महाज़ के लोगो संबोधित करते हुए ऑल इण्डिया पसमांदा मुस्लिम महाज़ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसीम राईन ने कहा है उन्होंने कहा कि भाजपा को बदनाम करते हो भाजपा से ज्यादा तो धर्म के आधार पर हिंदू, मुस्लिम की राजनीति अखिलेश यादव ख़ुद कर रहे हो नाम समाजवाद का और राजनीति धर्म आधारित , जैसे हिंदू समाज में अगड़ा, पिछड़ा और दलित होता है, करीब-क़रीब उसी तरह मुस्लिम में ये वर्ग होते हैं धर्म आधारित घिनौनी राजनीति करते ही, आपका PDA बिल्कुल फर्जी साबित हो जाता है।वैसे भी शुरू से ही समाजवादी पार्टी की नीति और नीयत पसमांदा मुस्लिम विरोधी रही है, हां, आपकी इस घिनौनी राजनीति को समझने में हम पसमांदा मुसलमानों को तीन दशक लग गए वैसे पहले एक मजबूरी थी कि उप्र के 16% वोटरों को सपा को वोट देने के अलावा कोई विकल्प नहीं था, क्योंकि बसपा और कांग्रेस तो और बड़ी पसमांदा मुस्लिम विरोधी पार्टियां थीं।पसमांदा मुसलमानों को यही लगता है कि भविष्य में समाजवादी पार्टी भी बसपा, रालोद, निषाद, राजभर, अपना दल की तरह सिर्फ एक जाति की पार्टी बन कर रह जाएगी वैसे भी पसमांदा का एक इतिहास जरूर याद रखिएगा कि कांग्रेस सहित जिस भी राज्य में पसमांदा ने, जिस भी क्षेत्रीय दल का साथ छोड़ा तो फिर वो पार्टी अकेले अपने दम पर, दुबारा सत्ता में नहीं आ पाई।जैसे बंगाल, बिहार, उप्र, दिल्ली, असम में कांग्रेस कई दशकों से सत्ता से बाहर है यही हाल कम्युनिस्ट पार्टी का भी कई राज्यों में हुआ है उप्र में बसपा, बिहार में राजद और दिल्ली में आप की अब अकेले अपने दम पर भविष्य में दुबारा सत्ता में वापसी की कोई संभावना नहीं नक़ली पीड़ीए है लोकसभा चुनाव में किसी पिछड़े मुस्लिम को टिकट नहीं दिया इसलिए अभी भी वक्त है कि जो पार्टी/सरकार पसमांदा मुसलमानों को अपने संगठन और सरकार में हिस्सेदारी देगा पसमाँदा मुसलमान उसी को वोट और सपोर्ट करेंगा! 2027 में सिर्फ मुंगेरीलाल के सपने देखने जैसा होगा।

