रिपोर्ट – हरीश


हमीरपुर। देशभक्तों की देश के प्रति भूमिका के मद्देनजर वर्णिता संस्था के तत्वावधान में विमर्श विविधा के अन्तर्गत जिनका देश ऋणी है के तहत सुमेरपुर कस्बे में संस्था के अध्यक्ष डा. भवानीदीन ने काकोरी काल के एक महत्वपूर्ण क्रांतिकारी रामकृष्ण खत्री की जयंती पर श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि रामकृष्ण खत्री भारत मां के
एक समर्पित सूरमा थे, इनका जन्म 3 मार्च 1902 में महाराष्ट्र के बुलढाना जिले के चिखली गांव में शिवलाल चौपड़ा तथा कृष्णाबाई के घर हुआ था। इन्होंने देश की आजादी के लिए क्रांतिकारी आन्दोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। 1925 की काकोरी ट्रेन केस में इन्हें दस वर्ष का कठोर कारावास हुआ था। इन्होंने देश के महत्वपूर्ण क्रांतिकारियों के अर्ध शताब्दी समारोहों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। काकोरी शहीद स्मृति अंक निकालने में इनका योगदान रहा। ये हिन्दी, गुरुमुखी, मराठी तथा अंग्रेजी के अच्छे जानकार थे। इन्होंने शहीदों की छाया में नामक महत्वपूर्ण कृति लिखी। इनके पांच पुत्र थे, ये अपने तीसरे पुत्र उदय के साथ लखनऊ में रहते थे। कालांतर में इनका 18 अक्टूबर 1996 में लखनऊ में निधन हो गया था। इस कार्यक्रम में सिद्धा, महावीर प्रजापति जेई, पंकज सिंह, प्रेम, सागर, प्रिन्स, रिचा, महावीर प्रजापति इलेक्ट्रीशियन, रामनरायन सोनकर, विकास, रामबाबू, होरी लाल, बाबूलाल, सतेन्द्र, राहुल प्रजापति आदि शामिल रहे।
