रिपोर्ट – कबीर


मुजफ्फरनगर। शहर में आयोजित एक अहम प्रेसवार्ता के दौरान राष्ट्रीय सैनिक संस्था की स्थानीय इकाई ने सैनिकों को किसानों की तर्ज पर आयकर से पूर्ण छूट देने की पुरजोर मांग उठाई। संस्था पदाधिकारियों ने दो टूक कहा कि सिर्फ “हमें तुम पर गर्व है” जैसे जुमलों से सैनिकों का सम्मान पूरा नहीं होता, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से भी वास्तविक राहत दी जानी चाहिए।
संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रापकर्मेन्द्रपाल त्यागी ने कहा कि भारतीय सेना ने हर दौर में देश की सुरक्षा और सम्मान की रक्षा की है। उन्होंने हालिया सैन्य कार्रवाई ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उल्लेख करते हुए दावा किया कि आतंकियों के ठिकानों को कुछ ही मिनटों में ध्वस्त कर दिया गया। उनका कहना था कि दुश्मन के ठिकानों और एयरबेस को भारी नुकसान पहुंचाया गया तथा एयर डिफेंस सिस्टम के जरिए मिसाइलों को मार गिराया गया।
प्रदेश अध्यक्ष कैप्टन के.पी. सिंह ने सेना के गौरवशाली इतिहास को रेखांकित करते हुए ऑपरेशन विजय, ऑपरेशन मेघदूत और बालाकोट हवाई हमला का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि चाहे सीमाओं पर युद्ध हो या संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन, या फिर प्राकृतिक आपदाओं में राहत कार्य—सेना ने हर मोर्चे पर अपनी जिम्मेदारी निभाई है।
गौरव सेनानी राजेंद्र राठी ने बताया कि संस्था पिछले 25 वर्षों से पंजीकृत और अराजनैतिक संगठन के रूप में कार्य कर रही है। इसका उद्देश्य पूर्व सैनिकों और शहीदों के परिजनों का सम्मान करना तथा विद्यालयों में प्रारंभिक सैनिक प्रशिक्षण को बढ़ावा देना है।
प्रेसवार्ता में मौजूद ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) और अन्य पूर्व सैनिकों ने कहा कि सीमा पर तैनात अधिकांश जवान कम आयु में ही सेवानिवृत्त हो जाते हैं। विषम परिस्थितियों में देश की रक्षा करने वाले इन जवानों के वेतन पर आयकर काटा जाना न्यायसंगत नहीं है। सुबेदार मेजर मनोज राठी ने कहा कि जिस गंभीरता से सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में सफलता हासिल की, उसी गंभीरता से सरकार को जवानों के हित में आयकर माफी पर निर्णय लेना चाहिए।
संस्था पदाधिकारियों ने अंत में केंद्र सरकार से मांग दोहराते हुए कहा कि जवान और किसान दोनों ही राष्ट्र की रीढ़ हैं। यदि किसानों को आयकर में छूट मिल सकती है तो देश की सीमाओं पर जान जोखिम में डालने वाले सैनिकों को भी समान राहत मिलनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अब समय आ गया है जब सैनिकों के सम्मान को शब्दों से आगे बढ़ाकर ठोस आर्थिक फैसलों में बदला जाए।
