रिपोर्ट – एकरार खान

गाजीपुर। सादात ब्लाक के ग्राम सभा बसही में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा—जी रामजी) के तहत बड़े पैमाने पर अनियमितता के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि योजना का काम धरातल पर कम और कागजों में अधिक दिखाया गया है।
स्थानीय लोगों के अनुसार मनरेगा के अंतर्गत दो साइडों की हाजिरी केवल कागजों में ही दर्ज होती रही, और दोनों साइडों का लोकेशन एक ही जगह पर रहा जबकि वास्तविक रूप से मजदूरों की मौजूदगी और काम नहीं हुआ। रिकॉर्ड में 133 मजदूरों के कार्यरत होने का उल्लेख बताया जा रहा है, परंतु गांव में उतनी संख्या में मजदूर काम करते नहीं दिखे।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि चार दिन पहले मात्र 10–12 महिलाओं से रोड किनारे घास छिलाई का सीमित कार्य कराया गया, जबकि उसी अवधि के लिए कागजों में व्यापक कार्य और अधिक मजदूरों की हाजिरी दर्शाई गई। इससे योजना के तहत भुगतान और कार्य सत्यापन पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मामले को लेकर विभागीय अधिकारी फिलहाल चुप्पी साधे हुए हैं, जिससे संदेह और गहरा गया है। ग्रामीणों ने इस कथित गड़बड़ी की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है, ताकि मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंच सके।
अब देखना यह है कि प्रशासन कब संज्ञान लेकर जांच शुरू करता है और क्या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होती है या नहीं।
