Homeउत्तर प्रदेशअपंजीकृत क्लीनिकों पर स्वास्थ्य विभाग की नजर, तीन को नोटिस

अपंजीकृत क्लीनिकों पर स्वास्थ्य विभाग की नजर, तीन को नोटिस

रिपोर्ट – कबीर

मुजफ्फरनगर/खतौली। ग्रामीण क्षेत्रों में नियमों को ताक पर रखकर संचालित किए जा रहे अपंजीकृत क्लीनिक, नर्सिंग होम, डेंटल सेंटर और पैथोलॉजी लैब के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। खतौली ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने विशेष सघन जांच अभियान चलाकर कई चिकित्सा प्रतिष्ठानों के अभिलेखों की जांच की। जांच के दौरान वैध पंजीकरण और शैक्षिक अहर्ता से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने पर तीन प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए गए हैं।

ब्लॉक प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. अवनीश कुमार सिंह के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने ग्राम पीपलहेड़ा, गालिबपुर और अंती में संचालित चिकित्सा प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। टीम ने मौके पर पहुंचकर क्लीनिकों में उपलब्ध सुविधाओं के साथ ही संचालकों से पंजीकरण, चिकित्सकीय योग्यता और अन्य जरूरी अभिलेखों के बारे में जानकारी ली। अधिकारियों ने दस्तावेजों की जांच करते हुए यह भी देखा कि संबंधित प्रतिष्ठान नियमानुसार पंजीकृत हैं या नहीं।

जांच के दौरान उपाध्याय क्लिनिक, माधव लैब और कल्याण आयुर्वेदिक सेंटर के संचालक मौके पर वैध पंजीकरण अथवा शैक्षिक अहर्ता से संबंधित अभिलेख प्रस्तुत नहीं कर सके। टीम की ओर से संचालकों से इस संबंध में जवाब मांगा गया, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर स्वास्थ्य विभाग ने नियमानुसार तीनों प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी कर दिए।

स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई के बाद ग्रामीण क्षेत्र में बिना पंजीकरण चिकित्सा सेवाएं संचालित करने वाले प्रतिष्ठान संचालकों में खलबली मची हुई है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि लोगों के स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जांच अभियान के दौरान सामने आने वाली अनियमितताओं के आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

ग्रामीण क्षेत्र में लगातार होगी जांच

स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलाया जा रहा यह जांच अभियान केवल एक दिन तक सीमित नहीं माना जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित क्लीनिक, नर्सिंग होम, डेंटल सेंटर और पैथोलॉजी लैब के पंजीकरण एवं संचालकों की शैक्षिक अहर्ता की जांच पर जोर दिया जा रहा है। विभाग का उद्देश्य बिना जरूरी योग्यता और अनुमति के चिकित्सा सेवाएं देने वाले संस्थानों पर प्रभावी कार्रवाई करना है, ताकि ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को सुरक्षित और मानकों के अनुरूप स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।

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