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पीढ़ियों के हुनर को मिली नई उड़ान, ओडीओपी ने बाराबंकी के बुनकरों को दिलाई नई पहचान, बिचौलियों की निर्भरता से निकलकर देश-दुनिया के बाजार तक पहुंचा बाराबंकी का पारंपरिक हथकरघा उद्योग

रिपोर्ट – संदीप वर्मा

बाराबंकी। “पहले हमारा हुनर बिचौलियों और सीमित बाजारों तक सिमटकर रह जाता था। मेहनत हमारी होती थी, लेकिन अपने उत्पाद को अपनी पहचान के साथ बड़े बाजार तक पहुंचाना आसान नहीं था। आज ओडीओपी योजना ने हमें पहचान भी दी है और बाजार तक पहुंच भी।” जैदपुर निवासी बुनकर एवं उद्यमी जफर अंसारी के ये शब्द उस बदलाव की कहानी बयां करते हैं, जो उत्तर प्रदेश सरकार की एक जनपद एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना ने बाराबंकी के पारंपरिक हथकरघा उद्योग और उससे जुड़े बुनकर परिवारों के जीवन में लाया है। जफर अंसारी की यह कहानी किसी एक उद्यम की सफलता भर नहीं, बल्कि जनपद के उन तमाम बुनकर परिवारों के बदलते हालात की तस्वीर है, जिन्हें अपने पुश्तैनी हुनर के साथ नई पहचान, बेहतर बाजार और कारोबार को विस्तार देने के अवसर मिले हैं।

पुश्तैनी हुनर को मिला सरकारी योजना का सहारा

बाराबंकी के जैदपुर सहित विभिन्न क्षेत्रों में बुनाई का कार्य पीढ़ियों से परिवारों की आजीविका का आधार रहा है। हुनर और मेहनत की कमी कभी नहीं रही, लेकिन सीमित बाजार, संसाधनों की कमी और बिचौलियों पर निर्भरता के कारण बुनकरों के सामने अपने उत्पाद को बड़े बाजार तक पहुंचाने की चुनौती बनी रहती थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में वर्ष 2018 में शुरू की गई ओडीओपी योजना ने इसी चुनौती को अवसर में बदलने का काम किया। बाराबंकी में हथकरघा उद्योग के अंतर्गत निर्मित उत्पादों को ओडीओपी उत्पाद के रूप में शामिल किए जाने के बाद जनपद के बुनकरों को अपने पारंपरिक हुनर को आधुनिक बाजार से जोड़ने का मंच मिला।

वित्तीय सहयोग से बढ़ी उत्पादन क्षमता, खुले नए बाजार

योजना के माध्यम से बुनकरों और उद्यमियों को वित्तीय सहायता, आधुनिक मशीनों, कच्चे माल, डिजाइन तथा बाजार से जुड़ने के अवसर उपलब्ध हुए। इससे उत्पादन क्षमता में वृद्धि के साथ-साथ उत्पादों की गुणवत्ता और बाजार तक पहुंच भी बेहतर हुई। अब बाराबंकी के हथकरघा उत्पाद स्थानीय बाजारों तक सीमित न रहकर देश के प्रमुख शहरों और बड़े व्यापारिक केंद्रों तक पहुंच रहे हैं। इस परिवर्तन के सशक्त उदाहरणों में से एक जफर अंसारी हैं, जिनका परिवार तीन पीढ़ियों से बुनाई के पुश्तैनी कार्य से जुड़ा हुआ है। ओडीओपी योजना के अंतर्गत जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केंद्र के माध्यम से उन्हें लगभग 18 लाख रुपये का ऋण प्राप्त हुआ। इस वित्तीय सहायता से उन्होंने 8 पावरलूम स्थापित किए तथा लगभग 10 लाख रुपये के धागे की व्यवस्था कर अपने उद्योग को विस्तार दिया। कारोबार बढ़ने के साथ उनके उत्पादों को कानपुर की पार्टियों से ऑर्डर मिलने लगे और आगे चलकर दिल्ली, मुंबई, कोलकाता तथा गुरुग्राम जैसे बड़े बाजारों से भी मांग प्राप्त होने लगी।

जैदपुर के करघे से अमेरिका तक पहुंची उत्पादों की पहचान

वर्ष 2020 में अमेरिका की प्रतिष्ठित कंपनी वॉलमार्ट से जुड़े डिजाइनर द्वारा भी उनके कारखाने का अवलोकन किया गया। ओडीओपी योजना के अंतर्गत तैयार किए गए उत्पादों के सैंपल को पसंद किया गया और इसके माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नए व्यावसायिक अवसर प्राप्त हुए। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण बनी कि स्थानीय स्तर पर पीढ़ियों से चला आ रहा हुनर गुणवत्ता, डिजाइन और बाजार की दृष्टि से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी जगह बना सकता है।

एक उद्यम से अनेक परिवारों को रोजगार

जफर अंसारी द्वारा बनाई गई एचएचआर हैंडलूम कंपनी के माध्यम से लगभग 60 से 70 बुनकरों को रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। इस तरह एक उद्यम के विस्तार का लाभ केवल एक परिवार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे जुड़े अनेक बुनकर परिवारों की आजीविका को भी मजबूती मिली है। यही ओडीओपी योजना की वास्तविक सफलता है-स्थानीय उत्पाद के साथ स्थानीय रोजगार और स्थानीय हुनर को आगे बढ़ाना।

जापानी प्रतिनिधिमंडल ने भी सराहा बाराबंकी का हुनर

हाल ही में इन्वेस्ट यूपी के माध्यम से आए जापानी प्रतिनिधिमंडल के स्वागत अवसर पर भी बाराबंकी के हथकरघा उत्पादों का स्टॉल लगाया गया। यहां निर्मित उत्पादों को जापानी प्रतिनिधिमंडल द्वारा सराहा गया। यह अवसर बाराबंकी के बुनकरों के लिए गौरव का विषय रहा और इसने स्थानीय हथकरघा उत्पादों की राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में संभावनाओं को भी नई मजबूती दी।

बिचौलियों की निर्भरता घटी, सीधे बाजार से जुड़ रहे बुनकर

ओडीओपी योजना के बाद बुनकरों के काम करने के तरीके में भी महत्वपूर्ण बदलाव आया है। पहले जहां अपने उत्पादों की बिक्री के लिए बिचौलियों पर निर्भर रहना पड़ता था, वहीं अब बुनकर और उद्यमी सीधे बड़ी कंपनियों तथा बाजार से जुड़ने लगे हैं। इससे उन्हें अपने उत्पाद की बेहतर कीमत मिलने के साथ-साथ कारोबार बढ़ाने, नए डिजाइन तैयार करने और अधिक लोगों को रोजगार देने के अवसर मिल रहे हैं।

जफर अंसारी एक उदाहरण, बदलाव से जुड़ा पूरा बुनकर समुदाय

जफर अंसारी की सफलता इस व्यापक बदलाव की महज एक मिसाल है। बाराबंकी के अनेक बुनकर परिवार आज अपने पुश्तैनी हुनर को आधुनिक तकनीक, नए डिजाइन और विस्तृत बाजार से जोड़कर आगे बढ़ रहे हैं। ओडीओपी ने उनके हुनर को केवल उत्पाद तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे पहचान, बाजार और सम्मान से जोड़ा है।

मुख्यमंत्री की दूरदर्शी सोच से स्थानीय हुनर को वैश्विक पहचान

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दूरदर्शी सोच से प्रारंभ की गई एक जनपद एक उत्पाद योजना आज उत्तर प्रदेश के पारंपरिक उद्योगों, शिल्पकारों और कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। योजना ने स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने के साथ-साथ रोजगार सृजन और उद्यमिता को भी बढ़ावा दिया है। बाराबंकी का हथकरघा उद्योग इस परिवर्तन का जीवंत उदाहरण है, जहां पीढ़ियों से करघे पर बुना जा रहा हर धागा अब आत्मनिर्भरता, रोजगार, सम्मान और समृद्धि की नई कहानी लिख रहा है।

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