रिपोर्ट शुभम सिंह
बांदाउत्तर प्रदेश के बांदा में स्वास्थ्य व्यवस्था और डॉक्टरों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला एक दर्दनाक मामला सामने आया है। थाना नरैनी क्षेत्र के पोंगरी गांव की निवासी शिवानी द्विवेदी ने बांदा पुलिस अधीक्षक को पत्र देकर आरोप लगाया है कि डॉक्टर आदित्य मिश्रा की लापरवाही और मनमानी के कारण उनके 14 महीने के इकलौते मासूम बेटे, शुभ द्विवेदी की असमय जान चली गई।
पीड़िता के अनुसार, 25 अगस्त 2026 को वे बच्चे के सामान्य बुखार का इलाज कराने महिला जिला अस्पताल गई थीं, लेकिन वहां पर्ची कटने के बाद भी डॉक्टर ने बच्चे को नहीं देखा और कर्मचारी के जरिए उन्हें निजी ‘शिवी अस्पताल’ भेज दिया गया। आरोप है कि निजी अस्पताल में बिना किसी रसीद के ₹10,000 जमा कराने के बाद अगले दिन सुबह बच्चे को एक के बाद एक 3 इंजेक्शन लगाए गए, जिसके तुरंत बाद मासूम का शरीर फड़कने लगा, आँखें पलट गईं और हाथ-पैर ठंडे पड़ गए। बदहवास परिजनों को बिना सही जानकारी दिए जबरन कैलाश अस्पताल भेजा गया, जहाँ जल्दबाजी में कागजों पर दस्तखत करवाने के महज 2 मिनट बाद बच्चे को मृत घोषित कर दिया गया।
लाचार माँ ने न्याय की गुहार लगाते हुए एसपी बांदा से मांग की है कि आरोपी डॉक्टर आदित्य मिश्रा के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी दर्ज की जाए और सबूत मिटाने की आशंका को देखते हुए शिवी अस्पताल, कैलाश अस्पताल व सरकारी अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज तथा ओरिजिनल मेडिकल फाइलें जब्त कर सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

