रिपोर्ट: शारिक खान, रामपुर
सरकारी योजना ने बदली ग्रामीण युवा की जिंदगी
उत्तर प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। रामपुर जिले की शाहबाद तहसील के आनवरिया गांव निवासी 32 वर्षीय अनुज सिंह इसकी एक प्रेरणादायक मिसाल बनकर उभरे हैं। हाईस्कूल तक पढ़े अनुज ने सरकारी योजना के तहत 1.40 लाख रुपये का ऋण लेकर मधुमक्खी पालन का व्यवसाय शुरू किया और आज न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है, बल्कि कई लोगों को रोजगार भी उपलब्ध करा रहे हैं।
खेती से सीमित आय, फिर बदला जीवन का रास्ता
अनुज सिंह पहले पारंपरिक खेती पर निर्भर थे, जिससे उन्हें सालाना लगभग 60 हजार रुपये की आय होती थी। बढ़ते खर्च और सीमित आमदनी के बीच उन्होंने आय बढ़ाने के लिए नए विकल्प तलाशे। इसी दौरान गांव के एक मधुमक्खी पालक से प्रेरणा मिलने पर उन्होंने मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना के बारे में जानकारी प्राप्त की और आवेदन करने का निर्णय लिया।
1.40 लाख रुपये के ऋण से शुरू किया व्यवसाय
अनुज ने खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के माध्यम से योजना के तहत आवेदन किया। प्रारंभ में कुछ पारिवारिक संकोच भी सामने आए, लेकिन उन्होंने अपने आत्मविश्वास के दम पर आगे बढ़ने का फैसला किया। करीब सवा महीने के भीतर उनका 1.40 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हो गया। इसके बाद उन्होंने मधुमक्खी पालन का व्यवसाय शुरू किया और धीरे-धीरे इसे विस्तार दिया।
65 बॉक्स से कर रहे मधुमक्खी पालन
व्यवसाय की शुरुआत में अनुज ने एपिस मेलिफेरा (Apis mellifera) प्रजाति की मधुमक्खियों के साथ काम शुरू किया। वर्तमान में उनके पास 65 मधुमक्खी बॉक्स हैं, जिनसे शहद का उत्पादन किया जाता है। अक्टूबर से फरवरी के बीच चलने वाले मुख्य उत्पादन सीजन में प्रत्येक बॉक्स से औसतन 8 से 10 किलोग्राम शहद प्राप्त होता है।
70 से 80 हजार रुपये तक की शुद्ध आय
अनुज के अनुसार, मधुमक्खी पालन से उन्हें प्रतिवर्ष लगभग 70 से 80 हजार रुपये की शुद्ध बचत हो रही है। हालांकि इस व्यवसाय में मौसम, फसलों और अन्य परिस्थितियों का प्रभाव पड़ता है, लेकिन सही प्रबंधन और निरंतर मेहनत से उन्होंने इसे लाभदायक बनाया है।
8 युवाओं को मिला रोजगार
अनुज सिंह की पहल का लाभ केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं है। उन्होंने अपने फार्म पर गांव और आसपास के 7 से 8 युवाओं को रोजगार दिया है। स्थानीय युवाओं को 6 हजार रुपये प्रतिमाह तथा अनुभवी कर्मचारियों को 10 हजार रुपये तक का मासिक वेतन दिया जा रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्र में स्वरोजगार के नए अवसर भी विकसित हुए हैं।
52 से अधिक लोग हुए प्रेरित
अनुज की सफलता से प्रेरित होकर आसपास के करीब 52 से 53 किसान और युवा भी मधुमक्खी पालन के व्यवसाय से जुड़ चुके हैं। इससे क्षेत्र में स्वरोजगार और कृषि आधारित उद्यमिता को बढ़ावा मिला है। ग्रामीणों का मानना है कि कम लागत में शुरू होने वाला यह व्यवसाय अतिरिक्त आय का अच्छा माध्यम बन सकता है।
शहद की आपूर्ति कई स्थानों तक
उत्पादित शहद की बिक्री के लिए अनुज ने व्यवस्थित विपणन व्यवस्था विकसित की है। वह जीएसटी पंजीकृत व्यापारी के माध्यम से शहद की थोक आपूर्ति करते हैं। उनके अनुसार, उत्पादित शहद रामपुर के अलावा अन्य जिलों और राज्यों तक भी भेजा जाता है।
चुनौतियों के बावजूद नहीं छोड़ा हौसला
अनुज बताते हैं कि मधुमक्खी पालन में कई चुनौतियां भी आती हैं। खेतों में रासायनिक कीटनाशकों के छिड़काव से कई बार मधुमक्खियों को नुकसान पहुंचता है। इसके अलावा शहद के दामों में उतार-चढ़ाव भी कारोबार को प्रभावित करता है। बावजूद इसके उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और लगातार अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाते रहे।
दूसरे युवाओं के लिए बने प्रेरणा स्रोत
आज अनुज सिंह की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद स्वरोजगार शुरू करना चाहते हैं। सरकारी योजना का लाभ लेकर उन्होंने न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार सृजन और उद्यमिता का भी उदाहरण प्रस्तुत किया।
निष्कर्ष
रामपुर के शाहबाद क्षेत्र के अनुज सिंह की सफलता यह दर्शाती है कि यदि सरकारी योजनाओं का सही तरीके से लाभ उठाया जाए और मेहनत के साथ काम किया जाए, तो ग्रामीण क्षेत्रों में भी आत्मनिर्भरता की मजबूत मिसाल कायम की जा सकती है। मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना के माध्यम से शुरू किया गया उनका मधुमक्खी पालन व्यवसाय आज उनके परिवार की आर्थिक मजबूती के साथ-साथ कई अन्य युवाओं के लिए भी रोजगार और प्रेरणा का माध्यम बन चुका है।
