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गोबर से ऊर्जा और ऊर्जा से आत्मनिर्भरता: रामपुर की ग्राम पंचायत किरा बनी ग्रामीण विकास की मिसाल

रिपोर्टर: शारिक खान (रामपुर)

रामपुर। जनपद के विकास खंड शाहबाद स्थित ग्राम पंचायत किरा ने स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण आत्मनिर्भरता की दिशा में एक उल्लेखनीय पहल की है। पंचायत द्वारा स्थापित बायोगैस प्लांट के माध्यम से गोबर को उपयोगी संसाधन में बदलकर ऊर्जा उत्पादन, जैविक खाद और अतिरिक्त आय का मॉडल विकसित किया गया है। पंचायत का दावा है कि इस पहल से गांव में स्वच्छता, ऊर्जा बचत और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिला है।

गौशाला के गोबर से तैयार हो रही स्वच्छ ऊर्जा

ग्राम पंचायत के अनुसार, पंचायत की गौशाला में संरक्षित 769 गौवंशों से प्रतिदिन निकलने वाले गोबर का उपयोग करते हुए 85 घन मीटर क्षमता का बायोगैस प्लांट स्थापित किया गया है। यह परियोजना स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) फेज-2 के तहत प्राप्त लगभग 40 लाख रुपये की धनराशि से विकसित की गई।

बताया गया कि प्लांट के संचालन के लिए प्रतिदिन लगभग 2,125 किलोग्राम गोबर का उपयोग किया जाता है, जिससे बायोगैस तैयार होती है।

बिजली उत्पादन का दावा

पंचायत के अनुसार, बायोगैस प्लांट से प्रतिदिन लगभग 51 किलोग्राम बायोगैस का उत्पादन हो रहा है। इस गैस से संचालित 15 केवीए जनरेटर के माध्यम से अब तक 25,200 यूनिट बिजली तैयार की जा चुकी है।

इस ऊर्जा का उपयोग गौशाला में चारा मशीन, सबमर्सिबल पंप, सार्वजनिक प्रकाश व्यवस्था तथा गौशाला कर्मचारियों के लिए रसोई गैस उपलब्ध कराने में किया जा रहा है।

स्लरी से बढ़ी पंचायत की आय

बायोगैस प्लांट से निकलने वाली स्लरी का उपयोग जैविक खाद के रूप में किया जा रहा है। पंचायत के मुताबिक, किसानों को जैविक खाद उपलब्ध कराकर अब तक 53,800 रुपये की आय अर्जित की गई है। यह राशि पंचायत के वन सोर्स रेवेन्यू (ओएसआर) खाते में जमा की गई है, जिसका उपयोग विकास कार्यों में किया जा रहा है।

सरसों तेल उत्पादन की भी शुरुआत

ग्राम पंचायत ने आय के नए स्रोत विकसित करने के उद्देश्य से कोल्ड प्रेस ऑयल एक्सपेलर मशीन भी स्थापित की है। पंचायत का कहना है कि इसके माध्यम से स्थानीय स्तर पर उत्पादित सरसों से शुद्ध तेल तैयार किया जाएगा, जिससे ग्रामीणों को लाभ मिलने के साथ पंचायत की आय भी बढ़ेगी।

पर्यावरण संरक्षण पर विशेष जोर

पंचायत का दावा है कि इस परियोजना से खुले में गोबर फैलने की समस्या में कमी आई है, जैविक खेती को बढ़ावा मिला है और पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम हुई है। इसके साथ ही स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग से पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी सकारात्मक परिणाम मिलने की बात कही गई है।

अन्य पंचायतों के लिए मॉडल बनने का दावा

ग्राम पंचायत किरा का कहना है कि यह परियोजना ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा, स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग और आर्थिक आत्मनिर्भरता का एक सफल मॉडल बनकर उभरी है। पंचायत का उद्देश्य है कि इस प्रकार की पहल से अन्य ग्राम पंचायतें भी प्रेरणा लेकर अपने क्षेत्र में नवाचार आधारित विकास कार्यों को बढ़ावा दें।

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