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बांदा में कृषि और पशु सखियां बनीं ग्रामीण विकास की नई ताकत, आजीविका मिशन से बढ़ रहा महिला सशक्तिकरण

रिपोर्ट: शुभम सिंह

ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बढ़ते कदम

बांदा। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत बांदा जिले में कृषि एवं पशु सखियों की पहल ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण का महत्वपूर्ण उदाहरण बन रही है। मिशन के अंतर्गत प्रशिक्षित महिलाओं को अब ‘फार्म आजीविका सखी’ के रूप में कार्य करने का अवसर मिल रहा है। प्रशासन के अनुसार जिले में लगभग 400 महिलाएं इस पहल से जुड़कर कृषि, पशुपालन और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने में योगदान दे रही हैं।

कृषि और पशुपालन दोनों क्षेत्रों में निभा रहीं भूमिका

फार्म आजीविका सखियां किसानों को प्राकृतिक खेती, जैविक कृषि और बेहतर पशुपालन संबंधी जानकारी उपलब्ध करा रही हैं। इसके साथ ही वे ग्रामीण परिवारों को खेती की नई तकनीकों, पशुओं की देखभाल और सरकारी योजनाओं की जानकारी भी दे रही हैं।

प्रेरणा पोषण वाटिका और किचन गार्डन को मिल रहा बढ़ावा

मिशन के तहत गांवों में प्रेरणा पोषण वाटिका और किचन गार्डन तैयार कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके माध्यम से परिवारों को घर के आसपास ताजी सब्जियां उगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे पोषण स्तर में सुधार और घरेलू जरूरतों की पूर्ति में मदद मिल रही है।

प्राकृतिक खेती को बढ़ावा

प्रशिक्षित सखियां किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। वे जैविक खाद और पारंपरिक कृषि पद्धतियों के उपयोग की जानकारी देती हैं तथा ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रम और चौपालों के माध्यम से खेती की लागत कम करने और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने पर जोर देती हैं।

पशुपालन में भी दे रही हैं सहयोग

फार्म आजीविका सखियां पशुपालन से जुड़े कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। वे पशुओं की देखभाल, टीकाकरण के प्रति जागरूकता और पशु स्वास्थ्य संबंधी जानकारी ग्रामीणों तक पहुंचा रही हैं। इस कार्य में वे पशुपालन विभाग के साथ समन्वय बनाकर काम कर रही हैं।

मानदेय से बढ़ रही आर्थिक आत्मनिर्भरता

अधिकारियों के अनुसार मिशन के अंतर्गत किए गए कार्यों के लिए महिलाओं को निर्धारित मानदेय सीधे उनके बैंक खातों में भेजा जाता है। इससे उनकी आय में वृद्धि हो रही है और वे आर्थिक रूप से अधिक आत्मनिर्भर बन रही हैं।

ग्रामीण विकास में बढ़ रही महिलाओं की भागीदारी

स्थानीय स्तर पर सरिता द्विवेदी, सरिता शर्मा, रीतु, राधा और श्रीदेवी जैसी कई महिलाएं इस पहल से जुड़कर अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही हैं। प्रशासन का मानना है कि इस तरह की पहल से महिलाओं की सामाजिक भागीदारी बढ़ने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।

निष्कर्ष

बांदा जिले में उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत संचालित फार्म आजीविका सखी कार्यक्रम महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया है। कृषि, पशुपालन और पोषण से जुड़े कार्यों में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी ग्रामीण विकास को नई दिशा देने के साथ-साथ आत्मनिर्भर गांवों की अवधारणा को भी मजबूत कर रही है।

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