रिपोर्टर : शुभम सिंह
लोकेशन : बांदा
मानसून के दौरान संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए बांदा जिला प्रशासन ने राहत एवं बचाव कार्यों की तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के जल शक्ति राज्य मंत्री रामकेश निषाद, जिलाधिकारी अमित आसेरी और पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर तैयारियों की समीक्षा की तथा अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।
बाढ़ चौकियों को रखा गया अलर्ट
जिलाधिकारी अमित आसेरी ने बताया कि जिले में संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए 76 बाढ़ चौकियां स्थापित की गई हैं। सभी चौकियों को 24 घंटे सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही केन और यमुना नदियों के जलस्तर की लगातार निगरानी की जा रही है।
शंकरपुरवा में आयोजित हुई बाढ़ पूर्व चौपाल
पैलानी क्षेत्र के शंकरपुरवा गांव में आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा बाढ़ पूर्व जागरूकता चौपाल का आयोजन किया गया। इस दौरान मंत्री, जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने ग्रामीणों से संवाद कर बाढ़ के दौरान अपनाई जाने वाली सावधानियों और प्रशासन की तैयारियों की जानकारी दी।
अधिकारियों ने ग्रामीणों से अपील की कि किसी भी आपात स्थिति में प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें और अफवाहों से बचें।
स्वास्थ्य और संचार व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश
जिलाधिकारी ने बताया कि बाढ़ प्रभावित गांवों में सूचना के त्वरित प्रसार के लिए पब्लिक एड्रेस सिस्टम (पीए सिस्टम) तथा आवश्यक स्थानों पर सोलर पैनल लगाने की योजना बनाई गई है।
स्वास्थ्य विभाग ने जानकारी दी कि संभावित आपदा से निपटने के लिए 18 स्वास्थ्य टीमें तैयार रखी गई हैं। आवश्यक दवाओं, ब्लीचिंग पाउडर और क्लोरीन की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। साथ ही गर्भवती महिलाओं का चिन्हांकन कर आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारी भी की गई है।
कटान रोकने के दिए निर्देश
जल शक्ति राज्य मंत्री रामकेश निषाद ने शंकरपुरवा क्षेत्र में नदी कटान का निरीक्षण किया और संबंधित अधिकारियों को कटान रोकने के लिए आवश्यक पिचिंग कार्य शीघ्र शुरू कराने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि बाढ़ नियंत्रण एवं राहत कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें।
प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि संभावित बाढ़ की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर संचालित किया जाएगा, ताकि जनहानि और नुकसान को न्यूनतम रखा जा सके।
