रिपोर्टर: कबीर
स्थान: मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश
बच्चों की प्रतिभा निखारने के लिए आयोजित की गई नाट्यशाला
मुजफ्फरनगर में बच्चों की रचनात्मक प्रतिभा और अभिनय कौशल को विकसित करने के उद्देश्य से 15 दिवसीय ग्रीष्मकालीन नाट्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। यह प्रशिक्षण शिविर संगीत नाटक अकादमी, लखनऊ के तत्वावधान में मानसी अभिनय गुरुकुल, सहारनपुर तथा ह्यूमैनिटी वेलफेयर सोसायटी, मुजफ्फरनगर के संयुक्त सहयोग से आयोजित किया गया है।
नाट्यशाला में बच्चों को अभिनय, संवाद अदायगी, मंच संचालन और रंगमंच की विभिन्न विधाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे उनकी कलात्मक क्षमता के साथ-साथ आत्मविश्वास का भी विकास हो सके।
वरिष्ठ रंगकर्मी दे रहे हैं प्रशिक्षण
प्रशिक्षण शिविर में वरिष्ठ रंगकर्मी एवं प्रशिक्षक योगेश पंवार प्रतिभागियों को अभिनय की बारीकियों से परिचित करा रहे हैं। प्रशिक्षण के दौरान संवाद बोलने की शैली, मंच पर आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुति देना, भाव-भंगिमाओं का प्रभावी उपयोग, शारीरिक अभिव्यक्ति तथा रंगमंच की तकनीकी जानकारी भी दी जा रही है।
प्रशिक्षक का उद्देश्य बच्चों को केवल अभिनय सिखाना ही नहीं, बल्कि उनमें रचनात्मक सोच, अनुशासन और टीम भावना का भी विकास करना है।
बड़ी संख्या में बच्चे ले रहे हैं भाग
ग्रीष्मकालीन नाट्यशाला में शहर और आसपास के क्षेत्रों से अनेक बच्चे उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों में क्रिश वर्मा, सार्थक कौशिक, सक्षम कौशिक, कनिष्क गोयल, सौम्या, सार्थक बंसल, वासु सिंघल, हम्माद, उमर, लवी सिंह, वैभवी, इशमान ग्रोवर और सलीम सहित कई अन्य प्रतिभागी शामिल हैं।
बच्चे प्रतिदिन अभ्यास सत्रों में भाग लेकर अभिनय की नई-नई तकनीकों को सीख रहे हैं और मंच पर अपनी प्रस्तुति को बेहतर बनाने का प्रयास कर रहे हैं।
व्यक्तित्व विकास पर विशेष ध्यान
आयोजकों का कहना है कि इस प्रकार की नाट्यशालाएं बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। अभिनय के माध्यम से बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ता है, अभिव्यक्ति की क्षमता विकसित होती है तथा सामाजिक और सांस्कृतिक विषयों के प्रति उनकी समझ भी मजबूत होती है।
रंगमंच बच्चों को संवाद कौशल, नेतृत्व क्षमता, अनुशासन और सामूहिक कार्य करने की भावना भी सिखाता है, जो उनके भविष्य के लिए उपयोगी साबित होती है।
सफल संचालन में संस्था की अहम भूमिका
कार्यक्रम के सफल संचालन और व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी ह्यूमैनिटी वेलफेयर सोसायटी के सचिव मोहम्मद शहवेज़ तथा संस्था की सदस्य साबरा निभा रही हैं।
उन्होंने बताया कि संस्था का उद्देश्य बच्चों को सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ना और उनकी छिपी हुई प्रतिभाओं को मंच प्रदान करना है। उनका मानना है कि इस प्रकार के प्रशिक्षण शिविर समाज में सकारात्मक सोच और सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देने का प्रभावी माध्यम हैं।
29 जून को होगा समापन समारोह
आयोजकों के अनुसार नाट्यशाला का समापन 29 जून 2026 को किया जाएगा। समापन अवसर पर प्रशिक्षक योगेश पंवार के निर्देशन में सभी प्रतिभागी विभिन्न सामाजिक विषयों पर आधारित नुक्कड़ नाटकों की प्रस्तुति देंगे।
इन प्रस्तुतियों में नशा मुक्ति, स्वच्छता मेरा धर्म, सामाजिक जागरूकता तथा जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया जाएगा, ताकि कला के माध्यम से समाज को सकारात्मक संदेश दिया जा सके।
सामाजिक जागरूकता का प्रभावी माध्यम बनेगा रंगमंच
आयोजकों का कहना है कि नुक्कड़ नाटक केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि समाज को जागरूक करने का एक प्रभावी तरीका भी हैं। सामाजिक समस्याओं पर आधारित प्रस्तुतियों के माध्यम से आम लोगों तक महत्वपूर्ण संदेश सरल और प्रभावशाली ढंग से पहुंचाए जा सकते हैं।
इस पहल का उद्देश्य बच्चों को सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति संवेदनशील बनाना और समाज में सकारात्मक परिवर्तन की भावना को प्रोत्साहित करना है।
अभिभावकों और सांस्कृतिक प्रेमियों में उत्साह
नाट्यशाला को लेकर अभिभावकों और क्षेत्र के सांस्कृतिक प्रेमियों में भी उत्साह देखने को मिल रहा है। अभिभावकों का मानना है कि इस प्रकार के प्रशिक्षण बच्चों के आत्मविश्वास, संचार कौशल और व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
स्थानीय लोगों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों को रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने के साथ-साथ भारतीय रंगमंच और सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति रुचि बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
