रिपोर्ट: कबीर
मुजफ्फरनगर/जानसठ। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा रजिस्ट्री कार्यालयों के निजीकरण की प्रस्तावित योजना के विरोध में तहसील बार एसोसिएशन जानसठ का आंदोलन बुधवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों, स्टांप विक्रेताओं और मुंशियों ने उप निबंधक कार्यालय परिसर में धरना देकर सरकार के फैसले के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। आंदोलन के चलते रजिस्ट्री कार्य पूरी तरह ठप रहा, जबकि न्यायिक कार्यों के बहिष्कार से तहसील परिसर की गतिविधियां भी प्रभावित रहीं।
बार एसोसिएशन के बैनर तले आयोजित धरने की अध्यक्षता बार संघ अध्यक्ष प्रमोद शर्मा एडवोकेट ने की, जबकि संचालन महासचिव दीपेश गुप्ता एडवोकेट ने किया। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि रजिस्ट्री कार्यालयों का निजीकरण केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों, स्टांप विक्रेताओं और मुंशियों के रोजगार पर सीधा हमला है।
धरने को संबोधित करते हुए महासचिव दीपेश गुप्ता एडवोकेट ने कहा कि यदि रजिस्ट्री व्यवस्था निजी कंपनियों के हवाले की जाती है तो इससे लाखों लोगों की आजीविका प्रभावित होगी। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि आम जनता की न्याय तक पहुंच और पारदर्शी व्यवस्था से भी जुड़ा हुआ है। निजीकरण से आम नागरिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की आशंका भी बढ़ जाएगी।
बार संघ अध्यक्ष प्रमोद शर्मा एडवोकेट ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक निजीकरण का प्रस्ताव वापस नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने अधिवक्ताओं और सहयोगी संगठनों से एकजुट रहने का आह्वान करते हुए कहा कि यह संघर्ष पूरे अधिवक्ता समाज और उससे जुड़े लाखों परिवारों के भविष्य और रोजगार की रक्षा का संघर्ष है।
धरना सभा को यशवंत कंबोज एडवोकेट, असलम अंसारी एडवोकेट, विमल पोसवाल एडवोकेट, संजीव चौधरी एडवोकेट, सुनील कपिल एडवोकेट तथा शशि सैनी एडवोकेट सहित कई वक्ताओं ने संबोधित किया। सभी ने सरकार से निजीकरण की प्रक्रिया तत्काल रोकने तथा अधिवक्ता संगठनों के साथ संवाद स्थापित कर समाधान निकालने की मांग की।
धरने में प्रदीप सैनी, रघुनाथ सिंह, विकास गुप्ता, कपिल कुमार, अबरार हुसैन, नसीम पाशा, मूलचंद सैनी, ऋषिपाल सैनी, गोविंद कुमार, सोहित कंबोज, मनीष प्रजापति, शशी भूषण, अक्षत जैन, संदीप कुमार, जितेंद्र तोमर, अनवर अली, परवेज जैदी, इमान अली और जितेंद्र विकल एडवोकेट सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे। वहीं दस्तावेज लेखक संघ अध्यक्ष शैलेंद्र गुप्ता, महासचिव सत्यवीर सिंह तथा स्टांप विक्रेताओं और मुंशियों ने भी आंदोलन को अपना समर्थन दिया।
धरनास्थल से आंदोलनकारियों ने स्पष्ट संदेश दिया कि यदि सरकार ने अधिवक्ता समाज की मांगों पर गंभीरता नहीं दिखाई तो आंदोलन को प्रदेशव्यापी स्वरूप दिया जाएगा। फिलहाल अनिश्चितकालीन धरना और हड़ताल जारी रहने से तहसील परिसर में रजिस्ट्री कार्य पूरी तरह ठप है और न्यायिक कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। अधिवक्ताओं का कहना है कि मांगें पूरी होने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
मुजफ्फरनगर न्यूज, जानसठ तहसील, रजिस्ट्री कार्यालय निजीकरण, वकीलों का धरना, तहसील बार एसोसिएशन, अधिवक्ता आंदोलन, रजिस्ट्री कार्य ठप, उत्तर प्रदेश समाचार, निजीकरण विरोध प्रदर्शन।
