रिपोर्ट: कबीर | ब्यूरो, मुजफ्फरनगर
मुजफ्फरनगर। जनपद के एक सरकारी अस्पताल में इलाज को लेकर गंभीर शिकायत सामने आई है। एक महिला ने अपनी दिव्यांग पुत्री के उपचार के दौरान कथित रूप से धनराशि मांगने, इलाज में लापरवाही बरतने और अधिकारियों द्वारा शिकायतों पर ध्यान न देने के आरोप लगाए हैं। पीड़िता ने पूरे मामले की शिकायत जिलाधिकारी से करते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
महिला का कहना है कि उसकी 13 वर्षीय शारीरिक एवं मानसिक रूप से दिव्यांग बेटी के इलाज के दौरान उसे कई परेशानियों का सामना करना पड़ा। हालांकि अस्पताल प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
जिलाधिकारी को दिया गया शिकायत पत्र
शामली रोड स्थित काशीराम आवास कॉलोनी निवासी रेशमा पत्नी मझर ने जिलाधिकारी को एक विस्तृत शिकायत पत्र सौंपा है। शिकायत में उन्होंने अपनी नाबालिग दिव्यांग पुत्री अक्शा के उपचार से जुड़ी कई समस्याओं का उल्लेख किया है।
रेशमा के अनुसार उनकी बेटी शारीरिक और मानसिक रूप से दिव्यांग है तथा उसे विशेष चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता रहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी अस्पताल में इलाज के दौरान उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिला।
ऑपरेशन के नाम पर धनराशि मांगने का आरोप
महिला का आरोप है कि जब वह अपनी बेटी को सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचीं तो चिकित्सकीय जांच और एक्स-रे के बाद ऑपरेशन की सलाह दी गई। शिकायत के अनुसार डॉक्टर द्वारा उपचार के लिए बड़ी धनराशि की आवश्यकता बताई गई।
रेशमा का कहना है कि उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए इलाज में सहायता की मांग की, लेकिन कथित रूप से बिना पैसे के उपचार करने से इनकार कर दिया गया। महिला का दावा है कि सरकारी अस्पताल में मिलने वाली सुविधाओं के बावजूद उनसे धनराशि की मांग की गई।
डीएम से शिकायत के बाद भी राहत नहीं मिलने का दावा
शिकायतकर्ता के अनुसार जब उन्हें अस्पताल स्तर पर समाधान नहीं मिला तो उन्होंने जिलाधिकारी से संपर्क किया। महिला का कहना है कि जिलाधिकारी द्वारा अस्पताल प्रशासन को बच्ची के निशुल्क उपचार के लिए निर्देश दिए गए थे।
हालांकि महिला ने आरोप लगाया कि इसके बावजूद उन्हें अपेक्षित राहत नहीं मिली। शिकायत में कहा गया है कि अस्पताल प्रशासन ने कथित रूप से उच्च अधिकारियों के निर्देशों को गंभीरता से नहीं लिया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है।
पड़ोसियों की मदद से कराया उपचार
रेशमा का कहना है कि आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने अपनी बेटी के इलाज के लिए हर संभव प्रयास किया। शिकायत के अनुसार बाद में पड़ोसियों और परिचित लोगों की मदद से कुछ धनराशि एकत्र की गई।
महिला का आरोप है कि मजबूरी में राशि देने के बाद ही ऑपरेशन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। हालांकि अस्पताल प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
अतिरिक्त धनराशि मांगने का आरोप
पीड़िता ने अपने शिकायत पत्र में यह भी दावा किया है कि उपचार के बाद जब वह फॉलोअप जांच के लिए अस्पताल पहुंचीं तो उनसे अतिरिक्त धनराशि मांगी गई।
महिला का आरोप है कि पैसे देने में असमर्थता जताने पर उनके साथ उचित व्यवहार नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उपचार के दौरान उनकी बेटी के साथ भी संवेदनशीलता नहीं दिखाई गई।
बच्ची की हालत बिगड़ने का दावा
रेशमा का कहना है कि उपचार के बाद उनकी बेटी की स्थिति में सुधार होने के बजाय स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ने लगीं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि चिकित्सकीय प्रक्रिया के दौरान लापरवाही बरती गई, जिससे बच्ची को अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ा।
महिला के अनुसार बाद में उन्होंने निजी अस्पताल में बच्ची की जांच कराई, जहां एक्स-रे रिपोर्ट में नई चिकित्सकीय समस्या सामने आने की बात कही गई। हालांकि इस दावे की पुष्टि संबंधित चिकित्सा दस्तावेजों और जांच रिपोर्ट के आधार पर ही हो सकेगी।
स्वास्थ्य सेवाओं पर उठे सवाल
इस शिकायत के सामने आने के बाद सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और मरीजों के साथ व्यवहार को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि मरीजों और उनके परिजनों की शिकायतों को गंभीरता से लेना आवश्यक है।
विशेष रूप से दिव्यांग बच्चों और गंभीर मरीजों के मामलों में अतिरिक्त संवेदनशीलता और पारदर्शिता की आवश्यकता होती है। यदि किसी स्तर पर अनियमितता या लापरवाही की शिकायत मिलती है तो उसकी निष्पक्ष जांच होना जरूरी है।
निष्पक्ष जांच की मांग
पीड़िता ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि यदि समय रहते उचित कार्रवाई होती तो उनकी बेटी को अतिरिक्त परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता।
महिला ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने की भी मांग की है। साथ ही अपनी दिव्यांग पुत्री के बेहतर उपचार की व्यवस्था कराने का अनुरोध किया है।
प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी निगाहें
फिलहाल यह मामला प्रशासन के संज्ञान में है और शिकायत की जांच की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। मामले की सच्चाई जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों की भी इस मामले पर नजर बनी हुई है। लोगों का मानना है कि यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।
निष्कर्ष
मुजफ्फरनगर में एक दिव्यांग बच्ची के इलाज को लेकर सामने आई शिकायत ने स्वास्थ्य सेवाओं और मरीजों के अधिकारों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़िता द्वारा लगाए गए आरोप फिलहाल जांच के विषय हैं और उनकी सत्यता की पुष्टि प्रशासनिक जांच के बाद ही हो सकेगी। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और पीड़ित परिवार को किस प्रकार राहत प्रदान की जाती है।
