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बांदा के खलारी बालू खदान में नियमों की धज्जियां उड़ने का आरोप, अवैध खनन को लेकर प्रशासन पर उठे सवाल

बांदा | संवाददाता – शुभम सिंह

उत्तर प्रदेश के बांदा जिले की नरैनी तहसील अंतर्गत खलारी बालू खदान एक बार फिर विवादों में घिर गई है। खदान क्षेत्र में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के नियमों की खुलेआम अनदेखी कर जलधारा के बीच से बालू निकाले जाने के आरोप लगे हैं। स्थानीय लोगों और किसानों का कहना है कि अवैध खनन के चलते न सिर्फ पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि ग्रामीणों की जमीनें और सड़कें भी बर्बाद हो रही हैं।

मामले को लेकर जिला प्रशासन, खनन विभाग और स्थानीय अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

जलधारा के बीच हो रहा खनन

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि खलारी बालू खदान में एनजीटी के नियमों को ताक पर रखकर नदी की जलधारा के बीच मशीनों से बालू निकाली जा रही है।

लोगों का कहना है कि इस तरह का खनन जलीय जीवों और पर्यावरण के लिए बेहद नुकसानदायक है। बावजूद इसके जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई करने के बजाय चुप्पी साधे हुए हैं।

प्रशासन पर दबाव में काम करने के आरोप

ग्रामीणों और स्थानीय सूत्रों का आरोप है कि राजनीतिक संरक्षण के चलते अवैध खनन पर रोक नहीं लग पा रही है।

कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि भाजपा नेता सुलभ सक्सेना के दबाव में जिला प्रशासन कार्रवाई करने से बच रहा है, जबकि दूसरी ओर सपा नेता इमरान पर भी प्रशासन और मीडिया को “मैनेज” करने के आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

किसानों ने लगाए धमकी और कब्जे के आरोप

ग्रामीण किसानों का आरोप है कि रात के अंधेरे में खेतों से जबरन बालू निकाली जा रही है। विरोध करने पर किसानों को कथित तौर पर जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं।

कुछ किसानों ने यह भी दावा किया कि उनकी जमीनों पर दबाव बनाकर अवैध कब्जा किया जा रहा है और प्रशासन से शिकायत के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही।

ओवरलोड ट्रकों से सड़कें बदहाल

ग्रामीणों का कहना है कि खदान से निकलने वाले ओवरलोड बालू ट्रकों ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनी सड़कों को पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया है।

गांव की सड़कों पर भारी वाहनों की लगातार आवाजाही के कारण सड़कें टूट चुकी हैं, जिससे आम लोगों को आवाजाही में परेशानी हो रही है।

खनन विभाग और प्रशासन पर उठे सवाल

मामले को लेकर खनिज अधिकारी और एसडीएम नरैनी की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि दिनदहाड़े नियमों का उल्लंघन हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग कार्रवाई करने के बजाय मूकदर्शक बने हुए हैं।

“माफिया का गढ़ बनता जा रहा खलारी”

ग्रामीणों का आरोप है कि नरैनी तहसील का खलारी गांव अब अवैध खनन माफियाओं का गढ़ बनता जा रहा है।

लोगों का कहना है कि प्रशासनिक ढिलाई और राजनीतिक संरक्षण के कारण खनन माफियाओं के हौसले बुलंद हैं और ग्रामीण खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

जनता पूछ रही जवाब

ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि क्या गांव की सड़कें केवल ओवरलोड ट्रकों के लिए बनाई गई थीं? लोगों का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो हालात और गंभीर हो सकते हैं।

स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर अवैध खनन पर तत्काल रोक लगाई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी निगाहें

फिलहाल पूरे मामले को लेकर प्रशासन की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि बांदा प्रशासन खलारी बालू खदान में लगाए गए गंभीर आरोपों पर क्या कार्रवाई करता है और क्या अवैध खनन पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।

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