रामपुर | शारिक खान की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशानुसार शनिवार को जिला जजी परिसर रामपुर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। इस विशेष आयोजन ने न केवल लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण का रास्ता खोला, बल्कि कई टूटते परिवारों को दोबारा एक होने का अवसर भी दिया। लोक अदालत में वैवाहिक विवादों सहित कुल 34 मामलों का आपसी सुलह-समझौते के आधार पर निस्तारण किया गया, जिनमें 14 वैवाहिक मामले प्रमुख रहे।प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय श्री अरविंद कुमार की अध्यक्षता में आयोजित इस लोक अदालत में कई ऐसे मामले सामने आए जहां पति-पत्नी के रिश्ते टूटने की कगार पर पहुंच चुके थे। लेकिन न्यायिक अधिकारियों की समझाइश, काउंसलिंग और सकारात्मक पहल के चलते 05 जोड़े फिर से साथ रहने के लिए राजी हो गए। यह पल अदालत परिसर में मौजूद सभी लोगों के लिए बेहद भावुक और प्रेरणादायक रहा।सुलह और समझाइश से जुड़े रिश्तेराष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान परिवार न्यायालय में वैवाहिक विवादों से जुड़े मामलों की सुनवाई बेहद संवेदनशील माहौल में की गई। प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय श्री अरविंद कुमार ने दोनों पक्षों को साथ बैठाकर विस्तारपूर्वक बातचीत की और रिश्तों को बचाने का प्रयास किया।कई घंटों तक चली काउंसलिंग और समझाइश के बाद 05 दंपतियों ने अपने पुराने मतभेद भुलाकर एक बार फिर साथ रहने का निर्णय लिया। समझौते के बाद अदालत परिसर में भावुक दृश्य देखने को मिला, जब पति-पत्नी ने एक-दूसरे को फूलमाला पहनाकर नए सिरे से जीवन की शुरुआत करने का संकल्प लिया।इस दौरान जनपद न्यायाधीश श्री भानु देव शर्मा सहित अन्य न्यायिक अधिकारी भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने सभी जोड़ों को सुखद वैवाहिक जीवन के लिए शुभकामनाएं दीं।34 मामलों का हुआ निस्तारणराष्ट्रीय लोक अदालत में केवल वैवाहिक मामलों ही नहीं, बल्कि धारा 125 सीआरपीसी और अन्य विभिन्न मामलों का भी निस्तारण किया गया। कुल 34 मामलों को आपसी सहमति और समझौते के आधार पर सुलझाया गया।अदालत में पहुंचे लोगों ने भी इस प्रक्रिया को सकारात्मक बताया। कई पक्षों ने कहा कि लंबे समय से चल रहे विवादों का समाधान एक ही दिन में हो जाना उनके लिए राहत की बात है। इससे समय और धन दोनों की बचत हुई।परिवार बचाने में अहम भूमिका निभा रही लोक अदालतन्यायिक अधिकारियों ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत केवल मुकदमों के त्वरित निस्तारण का मंच नहीं है, बल्कि यह सामाजिक रिश्तों को मजबूत करने और टूटते परिवारों को बचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।अधिकारियों के अनुसार अदालत का उद्देश्य केवल कानूनी प्रक्रिया पूरी करना नहीं, बल्कि लोगों के बीच आपसी संवाद और समझ को बढ़ावा देना भी है। विशेष रूप से वैवाहिक मामलों में अदालत पहले रिश्तों को बचाने का प्रयास करती है ताकि परिवार टूटने से बच सके।उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी गलतफहमियां और विवाद यदि समय रहते सुलझा लिए जाएं तो परिवारों को टूटने से बचाया जा सकता है। इसी सोच के साथ राष्ट्रीय लोक अदालत लोगों को समझौते और आपसी सहमति का रास्ता अपनाने के लिए प्रेरित करती है।भावुक माहौल ने छू लिए दिललोक अदालत में उस समय भावुक माहौल बन गया जब कई जोड़े, जो लंबे समय से अलग रह रहे थे, एक-दूसरे का हाथ थामकर फिर साथ रहने को तैयार हुए। अदालत परिसर में मौजूद लोगों ने इस दृश्य का स्वागत किया और न्यायिक अधिकारियों की पहल की सराहना की।कुछ दंपतियों ने कहा कि गुस्से और गलतफहमियों के कारण उनके रिश्तों में दूरियां बढ़ गई थीं, लेकिन अदालत की काउंसलिंग के बाद उन्हें अपने परिवार और रिश्तों की अहमियत समझ आई।समाज में सकारात्मक संदेशराष्ट्रीय लोक अदालत के इस आयोजन ने समाज में एक सकारात्मक संदेश भी दिया है। बढ़ते पारिवारिक विवादों और तलाक के मामलों के बीच इस तरह की पहल रिश्तों को बचाने और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने में मददगार साबित हो रही है।कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि लोक अदालतें लोगों को सस्ती, सरल और त्वरित न्याय व्यवस्था उपलब्ध कराने के साथ-साथ सामाजिक संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।लोगों ने की सराहनाराष्ट्रीय लोक अदालत में हुए समझौतों और परिवारों के दोबारा एक होने की खबर के बाद लोगों ने इस पहल की सराहना की। कई लोगों का कहना है कि अदालतों द्वारा केवल कानूनी प्रक्रिया पर ही नहीं, बल्कि मानवीय भावनाओं पर भी ध्यान देना समाज के लिए बेहद जरूरी है।रामपुर में आयोजित यह राष्ट्रीय लोक अदालत केवल मामलों के निस्तारण तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने कई परिवारों की जिंदगी में नई उम्मीद और खुशियां लौटाने का काम भी किया। टूटते रिश्तों को फिर से जोड़ने की यह पहल लोगों के लिए प्रेरणा बन गई है।
