रिपोर्ट – कबीर

मुजफ्फरनगर। जनपद में हिन्द मजदूर किसान समिति की ओर से आयोजित महासभा में रविवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष क्रांतिगुरु श्री चंद्रमोहन ने ‘फसल से पहले नस्ल बचाओ’ का जोरदार संदेश देते हुए नशे और जातिगत भेदभाव पर तीखा प्रहार किया। मंसूरपुर क्षेत्र के पुरा गांव में त्यागी समाज के अध्यक्ष संजीव त्यागी के आवास पर आयोजित जनसभा में उन्होंने कहा कि फसल दोबारा उगाई जा सकती है, लेकिन अगर नस्ल बर्बाद हो गई तो उसे बचाना बेहद मुश्किल होगा।
उन्होंने कहा कि आज समाज की सबसे बड़ी चुनौती नशे का बढ़ता जहर और जाति का कहर है, जो सीधे तौर पर किसान-मजदूर वर्ग की जड़ों को कमजोर कर रहा है। “नशा हमारा नाश करता है और जाति का जाल हमारा सत्यानाश,” इस दो टूक संदेश के साथ उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि ऐसे तत्वों और नेताओं का बहिष्कार करें जो समाज को बांटने और भटकाने का काम करते हैं।

सभा के बाद चंद्रमोहन सकौती टांडा पहुंचे, जहां उन्होंने शहीद शिरोमणि सूरजमल की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद वलीदपुर स्थित परमधाम में आयोजित विशाल मजदूर-किसान महासभा में भी उन्होंने हिस्सा लिया, जहां आसपास के क्षेत्रों से हजारों की संख्या में पुरुष और महिला किसान-मजदूर जुटे।
परमधाम की सभा में चंद्रमोहन ने अपने संबोधन में कहा कि कई परिवार नशे की लत के कारण अपनी जमीन तक गंवा चुके हैं, जिससे उनकी आजीविका ही खत्म हो गई। उन्होंने चेताया कि अगर जमीन नहीं बचेगी तो खेती कैसे होगी और किसान कहां जाएगा। उन्होंने भ्रष्ट नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि ये लोग नशा और जाति के जहर को बढ़ावा देकर खुद समृद्ध होते हैं, जबकि मजदूर-किसान वहीं के वहीं रह जाते हैं।
अपने भाषण में उन्होंने मनुस्मृति का उल्लेख करते हुए कहा कि जन्म के आधार पर जाति तय करने की अवधारणा गलत है। उन्होंने दावा किया कि समाज को एकजुट करने के लिए जाति और नशे से मुक्ति जरूरी है। इसी क्रम में सभा के दौरान हजारों युवाओं को जनेऊ धारण कराया गया और उन्हें नशा व जातिगत भेदभाव से दूर रहने की शपथ दिलाई गई।
सभा में एक अनोखी पहल भी देखने को मिली, जहां दलित और पिछड़े वर्ग के लोगों को जनेऊ धारण कराकर उनके नाम के साथ ‘ब्राह्मण’ जोड़ा गया। इस दौरान संदीप सैनी को ‘संदीप ब्राह्मण सैनी’ और रोहित वाल्मीकि को ‘रोहित ब्राह्मण वाल्मीकि’ नाम दिया गया। आयोजन में मौजूद लोगों को भी इसी तरह संबोधित किया गया, जिसे लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल बना हुआ है।
चंद्रमोहन ने अंत में कहा कि यदि समाज अपनी नस्ल को मजबूत कर लेता है, तो आवारा पशु, फसल का उचित मूल्य, बिजली और जनसंख्या नियंत्रण जैसे स्थानीय मुद्दे स्वतः हल होने लगेंगे। महासभा में उमड़ी भीड़ ने इस अभियान को व्यापक समर्थन देने का संकेत दिया।

