रिपोर्ट – कबीर

मुजफ्फरनगर। पश्चिम उत्तर प्रदेश के सियासी और किसान आंदोलन के केंद्र माने जाने वाले मुजफ्फरनगर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रस्तावित दौरे से पहले सियासत और किसान मुद्दे एक बार फिर गरमा गए हैं। मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर जहां प्रशासन तैयारियों में जुटा है, वहीं किसान नेता अपनी समस्याओं को सीधे मुख्यमंत्री के सामने रखने की मांग पर अड़ गए हैं।
भारतीय किसान यूनियन (सेवक) के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी विनीत त्यागी ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर किसानों के मुद्दों पर सीधी वार्ता की मांग उठाई है। उन्होंने साफ कहा कि जब मुख्यमंत्री उस क्षेत्र में आ रहे हैं, जिसे किसानों की राजधानी कहा जाता है, तो यहां के अन्नदाताओं की आवाज सुनना भी उतना ही जरूरी है।
चौधरी विनीत त्यागी ने जोर देते हुए कहा कि प्रदेश भर के किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ एक खुली बैठक आयोजित की जानी चाहिए, ताकि जमीनी हकीकत सामने आ सके। उनका कहना है कि प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली और किसानों की असल परेशानियों की सटीक जानकारी केवल वही किसान दे सकते हैं, जो रोज इन हालातों से जूझते हैं।
उन्होंने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कई बार किसानों की आवाज दबाने के लिए नेताओं को नजरबंद किया जाता है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है। “किसानों को अपनी बात रखने से रोकना लोकतंत्र नहीं, बल्कि तानाशाही की निशानी है,” उन्होंने तीखे शब्दों में कहा।
किसान नेता ने अंत में मुख्यमंत्री से अपील की कि वे सकारात्मक पहल करते हुए संवाद का रास्ता अपनाएं और किसानों की समस्याओं का स्थायी समाधान निकालें। अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री के इस दौरे में किसानों को अपनी बात रखने का अवसर मिलता है या नहीं, क्योंकि मुजफ्फरनगर की जमीन पर उठने वाली आवाज अक्सर प्रदेश की राजनीति की दिशा तय करती रही है।

