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गन्ना मूल्य, बिजली और फसल दाम पर सरकार घिरी—किसान यूनियन का तीखा प्रहार

रिपोर्ट – कबीर

मुज़फ्फरनगर, भोपा/क्षेत्र। प्रदेश में किसानों से किए गए वादों को लेकर सरकार एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। अराजनैतिक किसान यूनियन के जिला प्रभारी मोहित मलिक ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि बिजली फ्री करने का वादा अब तक पूरा नहीं हुआ, जिससे किसानों में भारी नाराजगी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि संगठन ने हमेशा किसानों के हक की लड़ाई लड़ी है और आगे भी यह संघर्ष जारी रहेगा।
मोहित मलिक ने बताया कि यूनियन ने गन्ने के मूल्य में बढ़ोतरी के लिए लगातार दबाव बनाया, कृषि यंत्रों पर छूट दिलाने में अहम भूमिका निभाई और अंश निर्धारण जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर मुख्यमंत्री तक अपनी बात पहुंचाई। उन्होंने मिलों पर सांठगांठ के आरोप लगाते हुए कहा कि किसान आज भी शोषण का शिकार हो रहा है, जबकि उद्योगपति फायदा उठा रहे हैं। प्रदूषण के मुद्दे पर भी उन्होंने मिलों को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि इस लड़ाई को और तेज किया जाएगा।
उन्होंने संगठन के कार्यकर्ताओं को संदेश देते हुए कहा कि एक नजर दिल्ली की नीतियों पर और दूसरी खेतों की वास्तविक स्थिति पर रखनी होगी, तभी किसानों की समस्याओं का सही समाधान संभव हो सकेगा।
वहीं, संगठन के प्रवक्ता धर्मेन्द्र मलिक ने फसलों के मूल्य निर्धारण को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि देश में आखिर फसलों के दाम तय करने की स्पष्ट नीति क्यों नहीं है। उनका कहना था कि किसानों की फसलों के दाम हर साल बढ़ने चाहिए, लेकिन हकीकत यह है कि एफसीआई के तहत गेहूं और चावल के दाम बढ़ने की संभावना बेहद कम है, जबकि फलों की मांग लगातार बढ़ रही है।
धर्मेन्द्र मलिक ने किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर बागवानी अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि शहतूत और अन्य मौसमी फलों के पेड़ों की संख्या बढ़ाना आज के समय की जरूरत है। इसके साथ ही मछली पालन भी किसानों के लिए आय बढ़ाने का मजबूत विकल्प बनकर उभर रहा है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि बदलते दौर में किसानों को नई तकनीकों और वैकल्पिक खेती की ओर कदम बढ़ाना ही होगा, तभी उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकेगी।

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