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क्षेत्रीय एकता और साझा संघर्ष को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आगोसस–के.एस.डी.सी. की संयुक्त सभा संपन्न

रिपोर्ट रेखा लामा/दार्जिलिंग

पिछले रविवार को स्थानीय गोर्खा भवन, ओदलाबाड़ी में आदिवासी गोरखा संयुक्त संघर्ष समिति (आगोसस) और कामतापुर राज्य का दर्जा मांग समिति (के.एस.डी.सी.) की तीसरे चरण की संयुक्त सभा भव्य एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई। सभा में दोनों संगठनों के केंद्रीय, राज्य, जिला तथा ब्लॉक स्तर के प्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता, युवा वर्ग एवं शुभेच्छु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
सभा में के.एस.डी.सी. के केंद्रीय समिति के महासचिव श्री देबेन्द्र नाथ राय तथा राज्य समिति, जिला समिति और माल ब्लॉक के प्रतिनिधियों की विशेष उपस्थिति रही। उन्होंने कामतापुर आंदोलन की वर्तमान स्थिति, संगठन विस्तार और भविष्य की रणनीतियों पर अपने विचार व्यक्त करते हुए संयुक्त
सहयोग को और अधिक मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता जताई।
वहीं आगोसस की ओर से पूर्व संस्थापक अध्यक्ष श्री सघन मोक्तान, वर्तमान अध्यक्ष श्री प्रदीप कुमार मोक्तान, श्री गणेश राई, श्री मनीष तामांग, श्री अर्जुन छेत्री, श्री डी. के. विश्वकर्मा, श्री कैलाश महाराज, सुश्री रुपा राई, श्री बचन राणा, सुश्री अमृता राई तथा श्री जितेन छेत्री उपस्थित रहे। आगोसस के प्रतिनिधियों ने संगठन के अब तक के संघर्ष, उपलब्धियों और भावी कार्यदिशा पर विस्तार से प्रकाश डाला।
ज्ञात हो कि आगोसस और के.एस.डी.सी. की संयुक्त पहल के अंतर्गत आयोजित यह तीसरे चरण की बैठक थी, जिसका मुख्य उद्देश्य आपसी समन्वय को मजबूत करना, साझा मुद्दों पर सहमति बनाना तथा क्षेत्रीय सामाजिक-राजनीतिक सरोकारों को संस्थागत रूप से आगे बढ़ाना है।
सभा में क्षेत्रीय पहचान, सामाजिक न्याय, युवा सशक्तिकरण, आर्थिक विकास, शिक्षा, रोजगार के अवसर तथा स्थानीय अधिकारों जैसे विषयों पर गंभीर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने साझा लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए एकजुट होकर आगे बढ़ने का दृढ़ संकल्प व्यक्त किया।
सभा में संयुक्त रूप से निर्णय लिया गया कि आगामी सभी कार्यक्रम पूर्णतः संवैधानिक, अहिंसात्मक और शांतिपूर्ण होंगे। किसी भी कार्यक्रम का उद्देश्य सरकार के विरोध में नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के अंतर्गत रहकर जनहित, सामाजिक न्याय और क्षेत्रीय विकास के मुद्दों को रचनात्मक एवं शिष्ट तरीके से उठाना होगा।
अंत में, इस तीसरे चरण की संयुक्त सभा ने क्षेत्रीय एकता, आपसी विश्वास और लोकतांत्रिक मूल्यों का सशक्त संदेश देते हुए भविष्य में और अधिक संगठित, योजनाबद्ध तथा प्रभावी रूप से आगे बढ़ने का संकल्प व्यक्त किया।

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