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फतेहपुर में ज़मीन फर्जीवाड़ा मामला: विवेचना बदलने और नाम हटाने के आरोप, पुलिस की भूमिका पर सवाल

रिपोर्ट – अनिल कुमार

फतेहपुर। जनपद में ज़मीन की फर्जी बिक्री से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें न सिर्फ धोखाधड़ी बल्कि विवेचना की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रकरण में पुलिस महानिरीक्षक, प्रयागराज परिक्षेत्र द्वारा पुलिस अधीक्षक फतेहपुर को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि मुकदमे की निष्पक्ष विवेचना कर 15 दिनों के भीतर प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।

मामला श्रीमती रीना वर्मा पत्नी अजय कुमार वर्मा, निवासी श्यामनगर, कानपुर से जुड़ा है। आरोप है कि भगवानदीन पुत्र मंगली, निवासी मदारपुर (मजरा अभयपुर), थाना औंग, फतेहपुर ने किसी अन्य व्यक्ति की भूमि को अपनी बताते हुए 6 अगस्त 2025 को ₹16.50 लाख में बैनामा कर दिया। जब क्रेता पक्ष ने मौके पर कब्जा लेने का प्रयास किया तो भूमि किसी अन्य के नाम दर्ज पाई गई। इस संबंध में 15 जनवरी 2026 को थाना औंग में मु०अ०सं० 05/2026 धारा 318(4) बीएनएस के तहत मुकदमा दर्ज हुआ।

हालांकि पीड़ित पक्ष का आरोप है कि प्रारंभिक विवेचक संतोष कुमार मिश्रा द्वारा मामले की गहन निगरानी और कार्यवाही की जा रही थी, लेकिन अचानक विवेचना बदलकर अनुज यादव को सौंप दी गई। आरोप है कि विवेचना बदलने के बाद एफआईआर में फेरबदल किया गया, कुछ नामजद आरोपियों को ‘अज्ञात’ दिखा दिया गया और लेखपाल शुभम सिंह तथा एक पूर्व ग्राम प्रधान का नाम हटाकर उन्हें बचाने का प्रयास किया गया।

पीड़ित पक्ष ने यह भी आरोप लगाया है कि थाना प्रभारी और एक हेड कांस्टेबल की भूमिका संदिग्ध रही, जिन पर एफआईआर में बदलाव कर आरोपियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया गया है। शिकायत में कहा गया है कि लिखित रूप से दिए गए नामों को जानबूझकर अज्ञात दिखाया गया, जिससे विवेचना की दिशा प्रभावित हुई।

इन गंभीर आरोपों को देखते हुए पुलिस महानिरीक्षक, प्रयागराज परिक्षेत्र ने प्रकरण को संज्ञान में लेते हुए पुलिस अधीक्षक फतेहपुर को निर्देशित किया है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष विवेचना सुनिश्चित की जाए और की गई कार्यवाही से समयबद्ध रूप से अवगत कराया जाए।

यह मामला अब केवल जमीन फर्जीवाड़े तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पुलिस तंत्र की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी प्रश्नचिह्न बन गया है। देखना यह है कि उच्चाधिकारियों के निर्देशों के बाद क्या दोषियों पर सख्त कार्रवाई होती है या मामला फाइलों में ही उलझकर रह जाता है।

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