मुजफ्फरनगर | ब्यूरो – कबीर
मुजफ्फरनगर जनपद न्यायालय में शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत ने त्वरित और सुलभ न्याय का नया रिकॉर्ड कायम किया। आपसी सुलह और समझौते के आधार पर कुल 4,32,584 मामलों का निस्तारण किया गया। लोक अदालत के माध्यम से करोड़ों रुपये की वसूली और प्रतिकर वितरण भी किया गया, जिससे हजारों लोगों को राहत मिली।राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ जनपद न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष बिरेन्द्र कुमार सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस दौरान न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं, बैंक अधिकारियों और बड़ी संख्या में वादकारियों की मौजूदगी रही।“लोक अदालत त्वरित और सुलभ न्याय का माध्यम”कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जनपद न्यायाधीश बिरेन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि लोक अदालत का उद्देश्य आम लोगों को सरल, सस्ता और त्वरित न्याय उपलब्ध कराना है।उन्होंने कहा,“लोक अदालत में हार-जीत नहीं होती, बल्कि आपसी सहमति से विवादों का समाधान किया जाता है। इससे रिश्तों में सौहार्द बना रहता है और समय व धन दोनों की बचत होती है।”उन्होंने बैंक अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऋण मामलों में ग्राहकों को अधिकतम राहत देकर अधिक से अधिक मामलों का निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।परिवार न्यायालयों में भी सुलह से निपटे मामलेप्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय खलीकुज्जमा ने पारिवारिक विवादों को आपसी समझौते से सुलझाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पारिवारिक मामलों में सुलह-समझौता समाज और परिवार दोनों के लिए बेहतर रास्ता है।लोक अदालत के दौरान परिवार न्यायालयों में 64 मामलों का निस्तारण समझौते के आधार पर किया गया। कई मामलों में टूटते रिश्तों को दोबारा जोड़ने का प्रयास भी सफल रहा।समाज के कमजोर वर्गों को मिली राहतराष्ट्रीय लोक अदालत के नोडल अधिकारी अपर जिला जज रवि कुमार दिवाकर ने कहा कि लोक अदालत समाज के कमजोर और वंचित वर्ग के लिए त्वरित न्याय का प्रभावी माध्यम बन चुकी है।उन्होंने कहा कि लंबे समय से लंबित मामलों का समाधान लोक अदालत के जरिए तेजी से हो रहा है, जिससे लोगों को अदालतों के चक्कर लगाने से राहत मिल रही है।करोड़ों रुपये का प्रतिकर और अर्थदंडजिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव डॉ. सत्येन्द्र कुमार चौधरी ने बताया कि लोक अदालत में कुल 4.32 लाख से अधिक मामलों का निस्तारण किया गया।मोटर दुर्घटना दावा प्राधिकरण की पीठासीन अधिकारी आदेश नैन ने 56 मामलों का निपटारा करते हुए 6.11 करोड़ रुपये से अधिक का प्रतिकर दिलाया।वहीं जनपद न्यायालय के विभिन्न न्यायालयों में 6,190 शमनीय फौजदारी वादों का निस्तारण कर 7.27 लाख रुपये का अर्थदंड वसूला गया। इसके अलावा 33 दीवानी मामलों का भी निस्तारण किया गया।एनआई एक्ट मामलों में भी बड़ी कार्रवाईएनआई एक्ट न्यायालयों में 31 मामलों का निस्तारण किया गया, जिसमें करीब 2.97 करोड़ रुपये का अर्थदंड वसूला गया।न्यायिक अधिकारियों का कहना है कि लोक अदालत के जरिए बैंकिंग और वित्तीय विवादों के समाधान में भी तेजी आई है, जिससे पक्षकारों को लंबी कानूनी प्रक्रिया से राहत मिल रही है।राजस्व मामलों में भी रिकॉर्ड निस्तारणजिलाधिकारी उमेश कुमार मिश्रा के नेतृत्व में राजस्व अधिकारियों ने 15,876 राजस्व मामलों का निस्तारण किया।इन मामलों में करीब 4.54 करोड़ रुपये का राजस्व वसूला गया। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि राजस्व विवादों के त्वरित समाधान से लोगों को बड़ी राहत मिली है।बैंकों ने किया करोड़ों का सेटलमेंटराष्ट्रीय लोक अदालत में विभिन्न बैंकों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। कुल 384 ऋण मामलों का समझौता कराया गया, जिसमें करीब 5.62 करोड़ रुपये की धनराशि का सेटलमेंट हुआ।बैंक अधिकारियों ने कहा कि लोक अदालत के माध्यम से ग्राहकों को राहत देने और बकाया मामलों के समाधान में काफी मदद मिलती है।न्यायिक व्यवस्था में बढ़ रहा भरोसाराष्ट्रीय लोक अदालत में रिकॉर्ड स्तर पर हुए निस्तारण को न्याय व्यवस्था के प्रति बढ़ते भरोसे के रूप में देखा जा रहा है। बड़ी संख्या में लोगों ने आपसी समझौते के जरिए अपने मामलों का समाधान कर राहत महसूस की।मुजफ्फरनगर में आयोजित यह राष्ट्रीय लोक अदालत केवल मामलों के निस्तारण तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने यह भी साबित किया कि संवाद और समझौते के जरिए कई विवादों का शांतिपूर्ण समाधान संभव है।
