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बैंक-दलाल गठजोड़ का आरोप: महिला कारोबारी से लाखों की ठगी, इंसाफ के लिए दर-दर भटक रही पीड़िता

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मुजफ्फरनगर | ब्यूरो – कबीर

मुजफ्फरनगर में बैंक और कथित दलाल की मिलीभगत से लाखों रुपये हड़पने का गंभीर मामला सामने आया है। कस्बा बघरा निवासी महिला कारोबारी रोशनजहां ने यूनियन बैंक शाखा कुटबी के उपप्रबंधक और एक कथित दलाल पर फर्जीवाड़ा कर लाखों रुपये निकालने का सनसनीखेज आरोप लगाया है। पीड़िता का कहना है कि व्यापार बढ़ाने के लिए लिया गया 10 लाख रुपये का लोन अब उसके लिए बड़ी मुसीबत बन गया है।महिला का आरोप है कि बैंक प्रक्रिया के नाम पर खाली चेकों पर हस्ताक्षर कराए गए और बाद में फर्जी आरटीजीएस दस्तावेज तैयार कर रकम निकाल ली गई। अब विरोध करने पर धमकियां दी जा रही हैं और पुलिस-प्रशासन से शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही।प्रेस वार्ता में लगाया गंभीर आरोपशनिवार को मीडिया सेंटर में पति मुकीम के साथ आयोजित प्रेस वार्ता में रोशनजहां ने पूरे मामले का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि वह “शाही लिबास क्लॉथ हाउस” नाम से कपड़ों का कारोबार करती हैं।व्यापार को बढ़ाने के उद्देश्य से मार्च 2024 में उन्होंने यूनियन बैंक शाखा कुटबी से 10 लाख रुपये के लोन के लिए आवेदन किया था। आरोप है कि लोन की पूरी प्रक्रिया कथित दलाल राहुल कुमार निवासी मुकन्दपुर के माध्यम से कराई गई, जबकि बैंक के उपप्रबंधक प्रभात ने भी इसमें अहम भूमिका निभाई।खाली चेकों पर कराए हस्ताक्षरपीड़िता के मुताबिक लोन पास कराने के नाम पर उनसे चार खाली चेकों पर हस्ताक्षर कराए गए। उन्हें भरोसा दिलाया गया कि यह बैंक की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है।कुछ दिन बाद उन्हें दोबारा बैंक बुलाया गया, जहां रसीदी टिकट लगी चार अलग-अलग दरखास्तों पर हस्ताक्षर करने का दबाव बनाया गया। इन दस्तावेजों में अलग-अलग खातों में लाखों रुपये आरटीजीएस करने का उल्लेख था।रोशनजहां का कहना है कि दस्तावेज देखकर उन्हें शक हुआ और उन्होंने हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया। इसके बाद वह कागजात अपने साथ घर ले आईं।खाते से निकले लाखों रुपयेपीड़िता के अनुसार जब उनके पति मुकीम ने बैंक पहुंचकर जानकारी की तो पता चला कि 10 लाख रुपये का लोन खाते में आ चुका था और उसमें से लगभग 7 लाख रुपये निकाले जा चुके थे।महिला का आरोप है कि बैंक उपप्रबंधक और कथित दलाल ने मिलीभगत कर गारंटी के नाम पर लिए गए चेकों का इस्तेमाल करते हुए रकम हड़प ली।आरोप यह भी है कि मामला खुलने के बाद करीब 3 लाख रुपये दोबारा खाते में जमा कर पूरे मामले को दबाने की कोशिश की गई।फर्जी दस्तावेजों पर दबाव का आरोपरोशनजहां ने आरोप लगाया कि अब उनसे फर्जी आरटीजीएस प्रपत्रों पर हस्ताक्षर कराने का दबाव बनाया जा रहा है ताकि पूरे कथित घोटाले को वैध साबित किया जा सके।उन्होंने कहा कि विरोध करने पर कथित दलाल द्वारा जान से मारने और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां दी जा रही हैं। पीड़िता का आरोप है कि आरोपी खुद को प्रभावशाली लोगों और पूर्व केंद्रीय मंत्री का करीबी बताकर कार्रवाई न होने की धमकी देता है।इंसाफ के लिए भटक रहा दंपतिपीड़ित दंपति का कहना है कि वह पिछले करीब एक महीने से थानों और सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल आश्वासन मिल रहा है।उन्होंने हाल ही में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर पूरे मामले की शिकायत की है। पीड़िता के अनुसार एसएसपी की ओर से निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है।बैंकिंग व्यवस्था पर उठे सवालइस मामले के सामने आने के बाद बैंकिंग प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी ग्राहक से बिना जानकारी दिए खाली चेकों पर हस्ताक्षर कराना गंभीर मामला हो सकता है।लोगों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल आर्थिक धोखाधड़ी नहीं बल्कि बैंकिंग व्यवस्था में भरोसे को कमजोर करने वाला मामला है।जांच के बाद साफ होगी तस्वीरफिलहाल मामले में पुलिस और संबंधित विभागों द्वारा जांच की बात कही जा रही है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और किस स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत हुई।लेकिन इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आम लोग बैंकिंग प्रक्रियाओं में खुद को कितना सुरक्षित महसूस कर सकते हैं।

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